नेपाल बाढ़ में 40 साल पुराना घर सुरक्षित: नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही

Krishna Yadav
20 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Ada khan
20 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Dev Kapoor
1 दिन पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Pihu Agarwal
1 दिन पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Pooja Reddy
1 दिन पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Ananya Sharma
1 दिन पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Riya Jain
1 दिन पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Riya Jain
1 दिन पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Rohan Desai
1 दिन पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Krishna Yadav
1 दिन पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
नेपाल और तिब्बत के कई इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। तेज पानी के बहाव में कई घर, सड़कें, पुल और वाहन बह गए हैं। कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा के बीच कई इलाकों से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। इसी दौरान नुवाकोट जिले के त्रिशूली बाजार से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
मलबे के बीच सुरक्षित रहा 40 साल पुराना हरा घर
नेपाल के नुवाकोट जिले के त्रिशूली बाजार में करीब 40 साल पुराना हरे रंग का मकान बाढ़ के बीच सुरक्षित खड़ा रहा। आसपास बाढ़ के तेज बहाव ने कई निर्माणों को नुकसान पहुंचाया, लेकिन यह मकान अपनी जगह पर मजबूती से टिका रहा। मकान के चारों तरफ पानी और मलबा जमा होने के बावजूद इसका मुख्य ढांचा ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ। घर की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद लोग इसकी मजबूती को लेकर चर्चा कर रहे हैं। मकान मालिक के मुताबिक इसके निर्माण के समय मजबूत नींव और ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया था। इसी वजह से भीषण बाढ़ के बीच यह घर परिवार के लिए सुरक्षित स्थान बना रहा।
मजबूत नींव और RCC ढांचे ने बचाया मकान
मकान मालिक के अनुसार घर का निर्माण लगभग चार दशक पहले कराया गया था और इसकी नींव को काफी मजबूत बनाया गया था। घर को नदी के नजदीक होने को ध्यान में रखते हुए मजबूत निर्माण सामग्री से तैयार किया गया था। मकान में मजबूत RCC फ्रेमवर्क का इस्तेमाल किया गया था, जिसने बाढ़ के तेज बहाव का दबाव सहने में मदद की। आसपास मौजूद कई सामान और वाहन पानी के बहाव में बह गए, लेकिन मकान का मुख्य ढांचा सुरक्षित रहा। बताया गया कि निर्माण के दौरान कंक्रीट की मोटी परतों और मजबूत सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। यही वजह मानी जा रही है कि पुराना मकान इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बावजूद खड़ा रहा।
परिवार के छह सदस्य घर में फंसे रहे
बाढ़ का पानी अचानक तेजी से बढ़ने के बाद मकान में मौजूद परिवार के छह सदस्य बाहर नहीं निकल सके। पानी का बहाव इतना तेज था कि घर से नीचे उतरना बेहद जोखिम भरा हो गया था। परिवार ने अपनी सुरक्षा के लिए ऊपरी हिस्से में शरण ली और करीब डेढ़ घंटे तक मदद का इंतजार किया। इस दौरान आसपास का पूरा इलाका बाढ़ के पानी और मलबे से घिरा हुआ था। परिवार के सदस्यों के लिए हर पल बेहद मुश्किल और डरावना बना हुआ था। हालात कुछ सामान्य होने के बाद स्थानीय लोगों और बचाव दल ने परिवार को बाहर निकालने की तैयारी शुरू की।
पाइप और रस्सियों से छह लोगों का रेस्क्यू
परिवार को सुरक्षित निकालने के लिए स्थानीय लोगों और रेस्क्यू टीम ने पाइप और रस्सियों की मदद ली। तेज पानी के बीच बचाव अभियान चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण था और हर कदम पर सावधानी बरती गई। रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित रास्ता तैयार करने के बाद परिवार के सदस्यों को एक-एक करके बाहर निकाला। काफी मशक्कत के बाद परिवार के सभी छह सदस्यों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचा दिया गया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने भी बचाव दल का सहयोग किया और परिवार को सुरक्षित निकालने में मदद की। इस रेस्क्यू ऑपरेशन ने मुश्किल हालात में लोगों की सूझबूझ और साहस को भी सामने रखा।
नेपाल की तबाही से भारत में भी बढ़ी चिंता
नेपाल और तिब्बत में आई इस प्राकृतिक आपदा के बाद हिमालयी क्षेत्रों में भी चिंता बढ़ गई है। भारी बारिश और बाढ़ के साथ ग्लेशियर झीलों के बढ़ते जलस्तर को लेकर भी लगातार निगरानी की जरूरत बताई जा रही है। हिमालयी क्षेत्र में मौजूद ग्लेशियर लेक्स के टूटने से अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में ऐसे हालात पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्रों में मौसम और जलस्तर में तेजी से होने वाले बदलाव गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। नेपाल की इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और समय पर चेतावनी की जरूरत को सामने ला दिया है।








