Bagh Print in Sri Lanka: श्रीलंका में छाई धार की बाग प्रिंट कला

श्रीलंका में छाई धार की बाग प्रिंट कला
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Reyansh Joshi

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9 घंटे पहले

Desh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.

Sai Mehta

Sai Mehta

10 घंटे पहले

Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

Nisha Shah

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11 घंटे पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Reyansh Joshi

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13 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

Arjun Singh

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13 घंटे पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

Anil Sen

Anil Sen

16 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Riya Jain

Riya Jain

16 घंटे पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

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श्रीलंका में अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंची धार की बाग प्रिंट कला
मध्यप्रदेश के धार जिले की पारंपरिक बाग प्रिंट कला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। कोलंबो में आयोजित 'सीलोन क्राफ्ट वीक 2026' में बाग गांव के शिल्पकार मोहम्मद आरिफ खत्री ने इस पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग कला का प्रदर्शन किया। भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने उनके स्टॉल का अवलोकन किया और इस कला के इतिहास तथा छपाई की तकनीक के बारे में जानकारी ली।

 

संतोष झा ने शिल्पकार से समझी पारंपरिक छपाई की तकनीक
भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने आयोजन के दौरान बाग प्रिंट के स्टॉल पर पहुंचकर लकड़ी के हाथ से तराशे गए ब्लॉक से कपड़े पर डिजाइन छापने की प्रक्रिया देखी। मोहम्मद आरिफ खत्री ने उन्हें बताया कि इस कला में पारंपरिक डिजाइन और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बाग प्रिंट की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, रंग तैयार करने और कपड़े पर छपाई के विभिन्न चरणों की जानकारी भी साझा की।

 

तनुजा झा ने खरीदी बाग प्रिंट से तैयार साड़ी
भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा की पत्नी तनुजा झा ने भी बाग प्रिंट के स्टॉल पर पहुंचकर हस्तनिर्मित वस्त्रों में रुचि दिखाई। उन्होंने कपड़ों के डिजाइन और छपाई की बारीकियों को समझा। पारंपरिक तकनीक से तैयार साड़ियां उन्हें पसंद आईं और उन्होंने इनकी खरीदारी भी की। अंतरराष्ट्रीय आयोजन में इस तरह की रुचि से धार के शिल्पकारों को अपनी कला और उत्पादों को नए दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिला।

 

करीब एक हजार साल पुरानी है बाग प्रिंट की परंपरा
बाग प्रिंट मध्यप्रदेश के धार जिले के बाग गांव की पारंपरिक पहचान है। इस कला की परंपरा लगभग एक हजार साल पुरानी मानी जाती है। इसमें सूती और रेशमी कपड़ों पर लकड़ी के हाथ से तराशे गए ब्लॉक की मदद से डिजाइन छापे जाते हैं। लाल और काले रंग इसके प्रमुख रंग हैं, जबकि ज्यामितीय आकृतियों, फूल-पत्तियों और पारंपरिक डिजाइनों का इस्तेमाल किया जाता है।

 

जीआई टैग से मिली बाग प्रिंट को आधिकारिक पहचान
बाग प्रिंट को वर्ष 2008 में भौगोलिक संकेतक यानी GI पहचान मिली थी। इससे इस शिल्प की विशिष्टता और धार जिले के बाग क्षेत्र से इसका संबंध आधिकारिक रूप से दर्ज हुआ। पारंपरिक छपाई के बाद कपड़े को धोने और रंग पक्का करने की कई प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है। आज इस तकनीक से साड़ियों, दुपट्टों, कुर्तों, स्टोल और घरों में इस्तेमाल होने वाले सजावटी वस्त्रों का निर्माण किया जा रहा है।

 

विश्व शिल्प परिषद के उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित हैं आरिफ खत्री
मोहम्मद आरिफ खत्री बाग प्रिंट को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले शिल्पकारों में शामिल हैं। उन्हें वर्ष 2021-22 के लिए विश्व शिल्प परिषद के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 'अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस' से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार उन्हें कोटा सिल्क के एक विशेष स्टोल पर बाग प्रिंट की उत्कृष्ट कारीगरी के लिए मिला था। इस स्टोल को तैयार करने में कई महीने लगे थे। आरिफ खत्री इससे पहले भी बैंकॉक सहित विदेशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं।

 

सीलोन क्राफ्ट वीक में भारत, श्रीलंका और नेपाल के शिल्पकार शामिल
कोलंबो में 29 अक्टूबर से 1 नवंबर तक आयोजित सीलोन क्राफ्ट वीक 2026 में भारत, श्रीलंका और नेपाल के शिल्पकार अपनी पारंपरिक कलाओं और हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। आयोजन का संचालन श्रीलंका की राष्ट्रीय शिल्प परिषद और उद्योग एवं उद्यमिता विकास मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है। इसमें भारतीय उच्चायोग के स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र की भी भागीदारी है।

 

भारत-श्रीलंका के सांस्कृतिक संबंधों को मिला बढ़ावा
30 अक्टूबर को भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा और श्रीलंका के उद्योग एवं उद्यमिता विकास मंत्रालय के उप मंत्री चतुरंगा अबेयसिंघे ने आयोजन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर संतोष झा ने कहा कि कला, शिल्प और संस्कृति देशों की सीमाओं से आगे जाकर लोगों को जोड़ते हैं और आपसी मित्रता को मजबूत बनाते हैं। ऐसे आयोजनों से शिल्पकारों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ने और अपने उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने का अवसर मिलता है। कोलंबो में आरिफ खत्री की भागीदारी ने मध्यप्रदेश की बाग प्रिंट परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया है।

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Reyansh Joshi

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9 घंटे पहले

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Sai Mehta

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10 घंटे पहले

Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

Nisha Shah

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11 घंटे पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

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13 घंटे पहले

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Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

Anil Sen

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Riya Jain

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16 घंटे पहले

Hamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.

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