जापान से निवेश बढ़ाने की तैयारी: पीयूष गोयल का बड़ा जापान दौरा

Ada khan
46 मिनट पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Dev Kapoor
3 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Payal jadon
4 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Dhruv Bhatt
4 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Shruti Bajpai
6 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Harsh Pandya
6 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Ritika Ghosh
7 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Neha Tripathi
7 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल जापान के दौरे पर भारत और जापान के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों को नई गति देने में जुटे हैं। गोयल 24 से 27 अगस्त तक जापान के दौरे पर हैं और उनके साथ भारत का अब तक का सबसे बड़ा करीब 200 सदस्यीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी गया है। प्रतिनिधिमंडल में सेमीकंडक्टर, मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी, ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों के कारोबारी शामिल हैं।
सेमीकंडक्टर कंपनियों के लिए BIS में राहत
जापान में हाईटेक कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने सेमीकंडक्टर और अन्य उन्नत तकनीकी क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ऐसे उपकरणों और कंपोनेंट्स के लिए BIS प्रमाणन नियमों में राहत देने का फ्रेमवर्क तैयार कर रही है, जिनकी जरूरत देश में मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं स्थापित करने के लिए होती है। इसका उद्देश्य जापानी और अन्य हाईटेक कंपनियों के लिए भारत में निवेश और उत्पादन शुरू करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
जापान के 10 ट्रिलियन येन निवेश पर जोर
भारत और जापान के बीच जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन के निजी निवेश का लक्ष्य तय किया गया है। पीयूष गोयल ने जापान दौरे के दौरान कहा कि इस निवेश प्रतिबद्धता की शुरुआत बेहद अच्छी रही है और कई बड़े निवेश पहले से ही आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देश सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हरित तकनीक और अगली पीढ़ी के उद्योगों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दे रहे हैं।
2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार का अनुमान
भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार को लेकर ASSOCHAM की नई रिपोर्ट में बड़ा अनुमान सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों देशों का व्यापार मौजूदा 27.47 अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2030 तक करीब 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में व्यापार समझौते को अपग्रेड करने, भारतीय निर्यात में विविधता बढ़ाने और दोनों देशों के कारोबारियों के बीच संपर्क मजबूत करने को इस लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।
भारतीय निर्यात के लिए जापान में बड़ा बाजार
ASSOCHAM के अनुसार जापान के कुल वैश्विक आयात में भारत की हिस्सेदारी अभी एक प्रतिशत से भी कम है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए निर्यात बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और समुद्री उत्पादों जैसे क्षेत्रों में भारत जापान के बाजार में अपनी पहुंच बढ़ा सकता है। फिलहाल 2025-26 में जापान से भारत का आयात करीब 21.43 अरब डॉलर, जबकि भारत का जापान को निर्यात करीब 6.04 अरब डॉलर रहा।
भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई दिशा
पीयूष गोयल के जापान दौरे का मुख्य फोकस व्यापार, निवेश और हाईटेक तकनीक में सहयोग बढ़ाना है। भारत जापानी कंपनियों को देश में उत्पादन और निवेश के लिए आकर्षित करने के साथ-साथ सेमीकंडक्टर तथा उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। वहीं दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को मजबूत करने के लिए भारत-जापान व्यापार समझौते की समीक्षा और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। इस दौरे को दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण कोशिश माना जा रहा है।








