Jamia Union Draft Committee: जामिया में छात्रसंघ संविधान का मसौदा तैयार करेगी कमेटी

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं
पहले आप अपनी बात रखें
जामिया में छात्रसंघ चुनाव की मांग के बीच नया कदम
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर विद्यार्थियों की भूख हड़ताल जारी है। इस मामले के समाधान के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्टूडेंट्स यूनियन के संविधान का मसौदा तैयार कराने का फैसला लिया है। प्रशासन के अनुसार, इस उद्देश्य से एक नई कमेटी गठित की जाएगी, जो छात्रसंघ के गठन से जुड़े कानूनी और संस्थागत पहलुओं की समीक्षा करेगी। भूख हड़ताल पर बैठे विद्यार्थियों की सेहत पर नजर रखने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. इरशाद हुसैन नकवी की देखरेख में मेडिकल टीम भी तैनात की गई है।
सात सदस्यीय कमेटी ने छात्र प्रतिनिधियों से की बातचीत
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 18 अक्टूबर को प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों की मांगों पर चर्चा और समाधान के लिए सात सदस्यीय कमेटी बनाई थी। कमेटी ने 19 अक्टूबर को छात्रों से संपर्क कर बातचीत शुरू की और उनके प्रतिनिधियों को डीन ऑफ सोशल साइंसेज के कार्यालय में चर्चा के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद 20 अक्टूबर को करीब दो घंटे तक बैठक हुई, जिसमें बातचीत का विवरण औपचारिक रूप दिया गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, छात्र प्रतिनिधि बैठक के मिनट्स पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत नहीं हुए।
21 अक्टूबर की बैठक में संविधान का मसौदा तैयार करने का फैसला
21 अक्टूबर को कुलपति प्रो. मजहर आसिफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में उच्चस्तरीय कमेटी की सिफारिशों और छात्रों के साथ हुई चर्चाओं पर विचार किया गया। इसके बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) का संविधान तैयार करने के लिए कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया। यह प्रक्रिया जामिया मिल्लिया इस्लामिया अधिनियम, 1988 की धारा 23 के संबंधित प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाई जाएगी। प्रशासन का कहना है कि इस मामले की समीक्षा में विश्वविद्यालय के कानूनी और संस्थागत ढांचे को ध्यान में रखा जाएगा।
2006 में यूनियन भंग होने से जुड़े पहलुओं की होगी समीक्षा
प्रस्तावित कमेटी वर्ष 2006 में जामिया स्टूडेंट्स यूनियन के भंग होने के कारणों, इससे जुड़े अदालती फैसलों और 2007 की लिंगदोह समिति की सिफारिशों का अध्ययन करेगी। इसके साथ ही छात्र निकायों और छात्रसंघ चुनावों से संबंधित न्यायिक आदेशों तथा विश्वविद्यालय के नियमों की भी समीक्षा की जाएगी। प्रशासन के अनुसार, पिछले दो दशकों में परिस्थितियों में बदलाव आया है, इसलिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुरूप मामले पर विचार करना जरूरी है। संविधान का मसौदा तैयार होने और आगे की प्रक्रिया से छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग पर होने वाली चर्चा को दिशा मिलने की उम्मीद है।








