RBI के सामने महंगाई बनाम ग्रोथ की चुनौती: SBI रिपोर्ट: रेपो रेट में बदलाव के आसार कम

Priya Iyer
0 सेकंड पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Ada khan
0 सेकंड पहलेSamaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेYeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.
Simran Arora
0 सेकंड पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
Ravi sinha
0 सेकंड पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
Ada khan
0 सेकंड पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
Ritika Ghosh
0 सेकंड पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Simran Arora
0 सेकंड पहलेYeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.
Navya Nair
0 सेकंड पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
Neel Saxena
0 सेकंड पहलेSamaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.
Priya Iyer
0 सेकंड पहलेYeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.
Anika Rajput
0 सेकंड पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Pooja Reddy
2 घंटे पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Saanvi Pandey
2 घंटे पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Navya Nair
2 घंटे पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
Yash Kulkarni
2 घंटे पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
Ada khan
2 घंटे पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Vaishali shinde
3 घंटे पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Ada khan
3 घंटे पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Ayaan Khan
3 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain!
Taushif Shekh
3 घंटे पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
Riya Jain
3 घंटे पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Nisha Shah
3 घंटे पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
Ravi sinha
4 घंटे पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Payal jadon
4 घंटे पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Ananya Sharma
4 घंटे पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
Nisha Shah
4 घंटे पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Dhruv Bhatt
5 घंटे पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
Trapti Tanwar
5 घंटे पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Simran Arora
6 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain!
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक से पहले एसबीआई रिसर्च की नई इकोव्रैप (Ecowrap) रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की मजबूत आर्थिक विकास दर को बनाए रखते हुए लगातार बनी हुई महंगाई पर नियंत्रण रखना होगी। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में आरबीआई बेहद संतुलित और सतर्क रुख अपनाएगा।
इस बार भी रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम
एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट 5.50 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य महंगाई, वैश्विक अनिश्चितता और रुपये पर दबाव को देखते हुए ब्याज दरों में कटौती फिलहाल जोखिम भरा कदम हो सकता है। इसलिए केंद्रीय बैंक इस बैठक में यथास्थिति बनाए रखने को प्राथमिकता दे सकता है।
पहली तिमाही में GDP करीब 7 प्रतिशत रहने का अनुमान
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। यात्री वाहनों की बिक्री में 24.1 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी और बिजली की मांग में 11.5 प्रतिशत का उछाल आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत दे रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास गति अभी भी मजबूत बनी हुई है।
महंगाई बनी रहेगी सबसे बड़ी चिंता
आर्थिक विकास के सकारात्मक संकेतों के बावजूद खुदरा महंगाई (CPI) अभी भी आरबीआई के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाली दो तिमाहियों तक महंगाई 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है, जबकि पूरे वित्त वर्ष में इसका औसत भी लगभग 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ऐसे में महंगाई पर नियंत्रण केंद्रीय बैंक की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।
वैश्विक संकट और रुपये पर दबाव भी अहम वजह
एसबीआई रिसर्च का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और विदेशी पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। इन परिस्थितियों में ब्याज दरों में जल्द कटौती करने से रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसलिए आरबीआई फिलहाल सतर्क नीति अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
विकास और स्थिरता दोनों पर रहेगा आरबीआई का फोकस
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में आरबीआई की रणनीति आर्थिक विकास को समर्थन देने के साथ-साथ महंगाई को नियंत्रित रखने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने पर केंद्रित रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां और घरेलू महंगाई में सुधार होता है, तभी भविष्य में ब्याज दरों में कटौती पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल केंद्रीय बैंक के लिए संतुलित मौद्रिक नीति ही सबसे उपयुक्त विकल्प मानी जा रही है।








