Bihar Sattu Makhana Shine At BRICS: BRICS में छाया बिहार का सत्तू-मखाना

BRICS में छाया बिहार का सत्तू-मखाना
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Aditya Verma

Aditya Verma

0 सेकंड पहले

Yeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.

Navya Nair

Navya Nair

59 मिनट पहले

Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Sonu rai

Sonu rai

1 घंटे पहले

Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Sneha Menon

Sneha Menon

3 घंटे पहले

Aam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.

Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

4 घंटे पहले

Yeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.

Vivaan Gupta

Vivaan Gupta

5 घंटे पहले

Jab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

6 घंटे पहले

Hum is cause ke saath hain!

Diya Gupta

Diya Gupta

7 घंटे पहले

Yeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.

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नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की क्षेत्रीय विविधता को खास अंदाज में दुनिया के सामने रखा गया। सम्मेलन में आने वाले पत्रकारों के लिए तैयार किए गए विशेष मीडिया किट में बिहार का पारंपरिक सत्तू और मखाना शामिल किया गया। इसके साथ ओडिशा की कोरापुट कॉफी और गुजरात के पारंपरिक हस्तशिल्प को भी जगह दी गई, जिससे भारत के अलग-अलग राज्यों के स्थानीय उत्पादों और संस्कृति की झलक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों तक पहुंची।


लोकल से ग्लोबल की दिखी तस्वीर
BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थानीय भारतीय उत्पादों को मीडिया किट का हिस्सा बनाना देश की विविध सांस्कृतिक और खाद्य परंपराओं को वैश्विक स्तर पर पेश करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बिहार का सत्तू और मखाना सिर्फ राज्य की पहचान से जुड़े उत्पाद नहीं हैं, बल्कि देश के पारंपरिक खान-पान और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का भी हिस्सा हैं। वहीं कोरापुट की कॉफी और गुजरात के हस्तशिल्प ने इस किट में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की पहचान को एक साथ प्रस्तुत किया।


सत्तू-मखाना को मिली नई पहचान
बिहार के सत्तू और मखाना को BRICS मीडिया किट में शामिल किए जाने के बाद राज्य में इसे स्थानीय उत्पादों के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। खास तौर पर मखाना बिहार की कृषि और स्थानीय कारोबार से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्पाद है, जबकि सत्तू लंबे समय से बिहार की पारंपरिक खाद्य पहचान का हिस्सा रहा है। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इन उत्पादों की मौजूदगी से बिहार के स्थानीय स्वाद और उत्पादों को व्यापक पहचान मिलने की चर्चा तेज हुई है।

 

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जताया आभार
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने BRICS मीडिया किट में सत्तू और मखाना को शामिल किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने इसे बिहार के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि राज्य के पारंपरिक स्वाद अब दुनिया के सामने पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस पहल को बिहार की नई पहचान और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर प्रस्तुत किया।


एक किट में दिखी भारत की विविधता
BRICS मीडिया किट में शामिल उत्पादों ने भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता की एक अलग तस्वीर पेश की। बिहार का सत्तू और मखाना, ओडिशा की कोरापुट कॉफी और गुजरात की पारंपरिक कारीगरी से जुड़े उत्पाद अलग-अलग राज्यों की स्थानीय पहचान को एक साझा अंतरराष्ट्रीय मंच पर लेकर आए। इस पहल के जरिए सम्मेलन में शामिल पत्रकारों और प्रतिनिधियों को भारत के पारंपरिक उत्पादों और शिल्प से परिचित कराने का प्रयास किया गया।


किसानों और स्थानीय उत्पादकों के लिए उम्मीद
BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन में स्थानीय उत्पादों को जगह मिलने से उनके बारे में वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ने की संभावना बनती है। हालांकि केवल मीडिया किट में शामिल किए जाने से निर्यात या किसानों की आय में तत्काल बढ़ोतरी साबित नहीं होती, लेकिन इससे सत्तू और मखाना जैसे उत्पादों की ब्रांड पहचान और बाजार में रुचि बढ़ाने का अवसर जरूर बन सकता है। बिहार के लिए यह पहल स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान से आगे अंतरराष्ट्रीय बाजार की चर्चा तक ले जाने वाली सकारात्मक तस्वीर के रूप में सामने आई है।

 

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Aditya Verma

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0 सेकंड पहले

Yeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.

Navya Nair

Navya Nair

59 मिनट पहले

Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Sonu rai

Sonu rai

1 घंटे पहले

Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Sneha Menon

Sneha Menon

3 घंटे पहले

Aam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.

Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

4 घंटे पहले

Yeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.

Vivaan Gupta

Vivaan Gupta

5 घंटे पहले

Jab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

6 घंटे पहले

Hum is cause ke saath hain!

Diya Gupta

Diya Gupta

7 घंटे पहले

Yeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.

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