Railway Water Quality Checks: भोपाल मंडल में पेयजल के 1870 नमूनों की जांच, सभी मानकों पर खरे

Taushif Shekh
4 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Yash Kulkarni
8 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Navya Nair
9 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Riya Jain
10 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Pihu Agarwal
12 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Taushif Shekh
12 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Anjali Patil
13 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
भोपाल मंडल में पेयजल के सभी 1870 नमूने उपयुक्त
पश्चिम मध्य रेल के भोपाल, जबलपुर और कोटा मंडलों में रेलवे यात्रियों और कर्मचारियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नियमित जांच की जा रही है। 28 सितंबर से 22 अक्टूबर 2026 के बीच भोपाल मंडल में अवशिष्ट क्लोरीन के 1,744 और बैक्टीरिया संबंधी जांच के 126 नमूने लिए गए। रेलवे प्रशासन के अनुसार, इन सभी 1,870 नमूनों के परिणाम निर्धारित मानकों के अनुरूप रहे। इसके अलावा, इंजीनियरिंग विभाग द्वारा किए गए एक रासायनिक परीक्षण का परिणाम भी संतोषजनक पाया गया।
जबलपुर मंडल में 24 नमूनों की जांच जारी
जबलपुर मंडल में इस अवधि के दौरान अवशिष्ट क्लोरीन के 1,909 नमूनों की जांच की गई। इनमें 1,907 नमूने मानकों के अनुरूप मिले, जबकि शेष दो नमूनों की चार घंटे बाद दोबारा जांच में परिणाम उपयुक्त पाए गए। बैक्टीरिया संबंधी जांच के लिए लिए गए 207 नमूनों में से 183 के परिणाम संतोषजनक रहे। शेष 24 नमूनों की जांच जारी है, इसलिए उनकी गुणवत्ता के अंतिम परिणाम अभी सामने नहीं आए हैं।
कोटा मंडल में भी पानी की गुणवत्ता की जांच
कोटा मंडल में अवशिष्ट क्लोरीन के 1,819 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 1,817 निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए। शेष दो नमूनों की दोबारा जांच के परिणाम उपलब्ध जानकारी में नहीं दिए गए हैं। वहीं, बैक्टीरिया संबंधी जांच के लिए लिए गए सभी 114 नमूनों के परिणाम उपयुक्त बताए गए हैं। तीनों मंडलों में की जा रही निगरानी का उद्देश्य पानी की गुणवत्ता पर नजर रखना और यात्रियों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है।
गुणवत्ता में कमी मिलने पर होगी सुधारात्मक कार्रवाई
रेलवे प्रशासन के अनुसार, जल स्रोतों और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाती है। पानी में अवशिष्ट क्लोरीन की मात्रा जांचने के साथ बैक्टीरिया और रासायनिक परीक्षण भी किए जाते हैं। भोपाल मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के मुताबिक, जांच के दौरान गुणवत्ता में कमी मिलने पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं। रेलवे का कहना है कि यात्रियों और रेलकर्मियों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जांच और निगरानी की प्रक्रिया जारी रहेगी।








