मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत: कमिश्नर कोर्ट ने RDA आदेश रोका

Navya Nair
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Neel Saxena
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Anika Rajput
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Reyansh Joshi
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी कानूनी राहत मिली है। मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह की अदालत ने रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा जारी ध्वस्तीकरण आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने अगली सुनवाई तक दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद फिलहाल यूनिवर्सिटी परिसर में किसी भी प्रकार की बुलडोजर कार्रवाई नहीं होगी।
38 इमारतों को अवैध बताकर जारी हुआ था नोटिस
रामपुर विकास प्राधिकरण ने 15 जुलाई 2026 को यूनिवर्सिटी प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए दावा किया था कि परिसर की कुल 40 इमारतों में से केवल मेडिकल कॉलेज और एक अकादमिक ब्लॉक का नक्शा स्वीकृत है। शेष 38 इमारतों को बिना अनुमति निर्मित बताते हुए उन्हें 15 दिनों के भीतर स्वयं हटाने का निर्देश दिया गया था। इसके लिए 30 जुलाई 2026 तक की समय-सीमा निर्धारित की गई थी।
यूनिवर्सिटी ट्रस्ट ने कोर्ट में रखा अपना पक्ष
जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट ने कमिश्नर कोर्ट में अपील दाखिल करते हुए कहा कि वर्ष 2006 में जब कैंपस का निर्माण शुरू हुआ था, तब यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। ट्रस्ट का दावा है कि उस समय भूमि ग्राम पंचायत और जिला पंचायत के अधीन थी, इसलिए आरडीए से भवन मानचित्र स्वीकृत कराना कानूनी रूप से आवश्यक नहीं था। इसी आधार पर ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती दी गई है।
विशेष सुनवाई में मिली अंतरिम राहत
मामले की नियमित सुनवाई 28 जुलाई को प्रस्तावित थी, लेकिन बार एसोसिएशन की शोकसभा के कारण यूनिवर्सिटी की ओर से विशेष सुनवाई का अनुरोध किया गया। अदालत ने 27 जुलाई को ही दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी। अंतिम निर्णय आने तक प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करेगा।
3,000 छात्रों ने ली राहत की सांस
ध्वस्तीकरण आदेश के बाद यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत करीब 3,000 छात्र-छात्राओं के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इसके विरोध में छात्र और शिक्षक पिछले 12 दिनों से यूनिवर्सिटी परिसर के मुख्य द्वार पर धरना दे रहे थे। कोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद छात्रों और शिक्षकों ने राहत व्यक्त की और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताया।
अंतिम फैसले पर टिकी सभी की निगाहें
अब इस मामले में सभी की नजर कमिश्नर कोर्ट की अंतिम सुनवाई पर है। अदालत के अंतिम निर्णय से यह तय होगा कि रामपुर विकास प्राधिकरण का ध्वस्तीकरण आदेश बरकरार रहेगा या यूनिवर्सिटी ट्रस्ट की कानूनी दलीलों को स्वीकार किया जाएगा। फिलहाल कोर्ट के आदेश के चलते विश्वविद्यालय परिसर में यथास्थिति बनी रहेगी।








