Mother Builds Chess Network: बेटी के शतरंज करियर के लिए निधि ने छोड़ी 50 लाख की नौकरी

बेटी के शतरंज करियर के लिए निधि ने छोड़ी 50 लाख की नौकरी
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बेटी के शतरंज करियर के लिए छोड़ी 50 लाख की नौकरी
बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए एक मां ने अपने सफल करियर को पीछे छोड़कर नई राह चुनी। निधि भसीन रोहिल्ला ने अपनी बेटी शिविका के शतरंज करियर को आगे बढ़ाने के लिए सालाना करीब 50 लाख रुपये का पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी। बेटी को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के अवसर दिलाने के लिए उठाया गया उनका यह कदम आगे चलकर शतरंज को बढ़ावा देने वाली एक पहल में बदल गया।

 

साढ़े छह साल की उम्र में शुरू हुआ शिविका का सफर
शिविका ने साल 2013 में करीब साढ़े छह साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया था। शुरुआती दौर में ही उन्होंने दिल्ली स्टेट चैंपियनशिप में दूसरा स्थान हासिल किया। बेटी की प्रतिभा देखकर निधि को लगा कि उसे सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिले तो वह इस खेल में आगे बढ़ सकती है। इसके बाद परिवार ने शिविका के शतरंज करियर पर अधिक ध्यान देना शुरू किया।

 

बेटी के लिए छोड़ना पड़ा कॉरपोरेट करियर
निधि के पास डेंटिस्ट की डिग्री है और उन्होंने बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों में सेल्स के क्षेत्र में काम किया था। लेकिन शिविका को लगातार टूर्नामेंट और प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग शहरों में जाना पड़ता था। नौकरी के साथ बेटी के सफर और अभ्यास का प्रबंधन करना मुश्किल हो रहा था। दिल्ली में बेहतर शतरंज प्रशिक्षण के सीमित विकल्पों के कारण दक्षिण भारत की यात्रा भी करनी पड़ती थी। ऐसे में निधि ने नौकरी छोड़कर बेटी के साथ रहने और उसके करियर को समय देने का फैसला किया।

 

आर्थिक चुनौतियों के बीच आया नया विचार
नौकरी छोड़ने के बाद परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से निधि के पति पर आ गई, जो दिल्ली के एम्स में डॉक्टर हैं। बचत भी धीरे-धीरे कम होने लगी। निधि को महसूस हुआ कि शिविका को जिस स्तर की कोचिंग और अभ्यास की जरूरत है, वह आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा। उन्होंने अलग-अलग तरीकों से बेहतर अभ्यास का माहौल बनाने की कोशिश की, लेकिन अपेक्षित स्तर के खिलाड़ियों और सुविधाओं तक पहुंच आसान नहीं थी।

 

'चेस कॉफी कनेक्ट' से बनाई नई पहल
इसी चुनौती के बीच निधि ने ऐसा स्थान बनाने का विचार किया, जहां शतरंज खेलने वाले बच्चे और दूसरे खिलाड़ी एक साथ मिलकर अभ्यास कर सकें। इस सोच से SR Chess Academy के साथ 'चेस कॉफी कनेक्ट' की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को कैफे जैसे सहज माहौल में मिलने, खेलने और एक-दूसरे से सीखने का अवसर देना था। शिविका की कोचिंग से जुड़े संसाधनों और जगह को दूसरे खिलाड़ियों के लिए भी उपलब्ध कराया गया।

 

बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक को मौका
'चेस कॉफी कनेक्ट' में बच्चों के साथ वरिष्ठ नागरिक भी शतरंज खेलने आते हैं। निधि जरूरतमंद खिलाड़ियों की मदद करने की कोशिश करती हैं। वरिष्ठ नागरिकों को छूट दी जाती है और जो बच्चे फीस देने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें मुफ्त खेलने का अवसर भी मिलता है। इस पहल का मकसद केवल कमाई करना नहीं, बल्कि अलग-अलग उम्र के लोगों तक शतरंज की पहुंच बढ़ाना है।

 

आठ राज्यों में फैला नेटवर्क, शिविका बनीं महिला इंटरनेशनल मास्टर
रिपोर्ट के मुताबिक, 'चेस कॉफी कनेक्ट' का नेटवर्क आठ राज्यों तक पहुंच चुका है और हर महीने 40 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस पहल से 16 लोगों को रोजगार मिला है, जबकि करीब 100 स्वयंसेवक भी इससे जुड़े हैं। निधि अब भी प्रायोजकों की कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं, लेकिन उनका प्रयास जारी है। वहीं शिविका शतरंज में आगे बढ़ते हुए महिला इंटरनेशनल मास्टर का खिताब हासिल कर चुकी हैं। निधि की कहानी बताती है कि एक मां का समर्पण किस तरह बेटी के सपने के साथ-साथ दूसरों के लिए भी अवसर तैयार कर सकता है।

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