Iran Rejects US Response: अमेरिका के जवाब से संतुष्ट नहीं ईरान, होर्मुज खोलने से किया इनकार

Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Kabir Shukla
4 घंटे पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
Taushif Shekh
5 घंटे पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
Aryan Malhotra
6 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Vihaan Patel
6 घंटे पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Ada khan
8 घंटे पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Dev Kapoor
8 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Rohan Desai
10 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
अमेरिका के जवाब से संतुष्ट नहीं ईरान
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर अमेरिका के जवाब को नाकाफी बताते हुए अपनी शर्तें पूरी होने तक रास्ता खोलने से इनकार किया है। ईरान का कहना है कि उसने अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी थीं, जिनमें से कुछ पर अमेरिकी पक्ष ने सहमति जताई, लेकिन बाकी मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई के मुताबिक, अमेरिका को शेष शर्तों पर अपना रुख साफ करना होगा। ईरानी पक्ष ने संकेत दिया है कि जब तक सभी शर्तों पर सहमति नहीं बनती, तब तक बातचीत आगे बढ़ने की संभावना सीमित रहेगी।
कतर के जरिए दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान
अमेरिका और ईरान के बीच संदेश पहुंचाने में कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने कतर के माध्यम से ईरान को अपना जवाब भेजा था। ईरान चाहता है कि दोनों देश जून में हुए इस्लामाबाद समझौते के आधार पर बातचीत को आगे बढ़ाएं। उस समझौते में युद्धविराम के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे। दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद केवल शर्तों पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी है कि उन्हें किस क्रम में लागू किया जाए।
परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत से फिलहाल दूरी
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका के प्रस्तावों में कई पुरानी मांगें शामिल हैं, जिनमें परमाणु कार्यक्रम से संबंधित मुद्दे भी हैं। उन्होंने उन खबरों को गलत बताया, जिनमें दावा किया गया था कि प्रतिबंध हटाने के बदले ईरान संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी को जांच की अनुमति देने के लिए तैयार है। ईरानी पक्ष के मुताबिक, उसकी प्राथमिकता फिलहाल होर्मुज क्षेत्र में सुरक्षा बहाल करना है। वहीं, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंधों और निगरानी से जुड़े मुद्दों पर सहमति चाहता है। इन अलग-अलग प्राथमिकताओं के कारण बातचीत में गतिरोध बना हुआ है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों से पहले इस रास्ते से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी LNG आपूर्ति गुजरती थी। इस मार्ग पर आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की उपलब्धता, परिवहन लागत और कीमतों पर असर पड़ सकता है। ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि समुद्री यातायात कितने समय तक प्रभावित रहता है और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग कितनी क्षमता से काम कर पाते हैं।
सात शर्तों पर सहमति के बिना समझौता मुश्किल
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने भी कहा था कि जून के इस्लामाबाद समझौते से जुड़ी सभी सात शर्तें पूरी होने तक होर्मुज को अमेरिका के लिए नहीं खोला जाएगा। ईरान का आरोप है कि अमेरिका एकतरफा मांगों के जरिए बातचीत को लंबा खींच रहा है। दूसरी ओर, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अमेरिकी चिंताएं भी वार्ता का हिस्सा हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। आगे की बातचीत में शर्तों के क्रम, समुद्री सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम पर दोनों पक्षों का रुख निर्णायक होगा।








