Pakistan Declares Emergency: कराची में 20 अक्टूबर तक धारा 144 लागू, रैलियों और धरनों पर रोक

Arjun Singh
0 सेकंड पहलेDuniya mein kuch bada hone wala hai, taiyar rehna hoga.
Pranav Srivastava
2 घंटे पहलेYeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.
Dhruv Bhatt
4 घंटे पहलेYeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.
Taushif Shekh
5 घंटे पहलेYeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.
Kavya Mishra
6 घंटे पहलेVishwa shanti ke liye yeh situation concerning hai.
Sonu rai
6 घंटे पहलेIndia ka is maamle mein kya role hoga?
Kabir Shukla
8 घंटे पहलेPoori duniya is khabar par nazar rakh rahi hai.
Sneha Menon
9 घंटे पहलेAise haalaaton mein diplomatic relations bahut important hote hain.
पाकिस्तान में सुरक्षा और राजनीतिक तनाव के बीच सख्त कदम
पाकिस्तान में आतंकवाद और राजनीतिक विरोध के बीच तनाव बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया है। इसके साथ ही सेना की तैनाती का आदेश जारी किया गया है। दूसरी ओर, कराची में 11 से 20 अक्टूबर तक धारा 144 लागू कर रैलियों, धरनों और सार्वजनिक जमावड़ों पर प्रतिबंध लगाने की जानकारी दी गई है। इन कदमों के बीच सुरक्षा व्यवस्था और विपक्ष के विरोध को लेकर बहस तेज हो गई है।
खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन का फैसला
रिपोर्ट के अनुसार, 11 अक्टूबर को पाकिस्तान की संघीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने का निर्णय लिया। इसके तहत प्रांतीय सरकार के अधिकार गवर्नर को सौंपे जाने की बात कही गई है। सरकार ने 11 सदस्यीय सलाहकार परिषद बनाने और 12 जिलों के प्रशासनिक मामलों के लिए अलग सचिवालय स्थापित करने की भी घोषणा की है। अफगानिस्तान की सीमा से लगा यह प्रांत लंबे समय से आतंकवादी हिंसा से प्रभावित रहा है। केंद्र सरकार का आरोप है कि प्रांतीय प्रशासन आतंकवाद से निपटने में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रहा, जबकि इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस कदम को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
सेना की तैनाती और पुलिस बल की कमी का दावा
रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने 11 अक्टूबर को संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत सेना की तैनाती का आदेश जारी किया। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हवाले से कहा गया है कि खैबर पख्तूनख्वा में पिछले दो वर्षों के दौरान करीब 6,200 आतंकवादी घटनाएं हुईं और लगभग 1,200 लोगों की मौत हुई। उन्होंने प्रांत में करीब 1.25 लाख पुलिसकर्मी होने और लगभग 17 हजार पद खाली रहने का भी दावा किया। ये आंकड़े पाकिस्तानी सरकार की ओर से बताए गए हैं। सरकार का तर्क है कि सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेना की सहायता जरूरी है।
कराची में 20 अक्टूबर तक धारा 144 लागू
खैबर पख्तूनख्वा में उठाए गए कदमों के बीच कराची प्रशासन ने भी सख्ती बढ़ाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 11 से 20 अक्टूबर तक धारा 144 लागू की गई है, जिसके तहत पांच से अधिक लोगों के एक स्थान पर इकट्ठा होने, रैली निकालने और धरना-प्रदर्शन करने पर रोक लगाई गई है। प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शनों के कारण यातायात प्रभावित हो रहा था और आम लोगों की आवाजाही के साथ अस्पतालों तक पहुंचने में भी परेशानी हो रही थी। इस प्रतिबंध का असर राजनीतिक दलों की प्रस्तावित गतिविधियों पर पड़ सकता है।
इमरान खान की रिहाई को लेकर PTI का विरोध
इमरान खान की रिहाई, संविधान के पालन और कानून के शासन की मांग पाकिस्तान की राजनीति में प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, PTI ने कराची में कई स्थानों पर प्रदर्शन की योजना बनाई थी। पार्टी समर्थक सरकार के खिलाफ विरोध जता रहे हैं और इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहे हैं। ऐसे में सार्वजनिक जमावड़ों पर प्रतिबंध से सरकार और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, विरोध-प्रदर्शनों और प्रशासनिक प्रतिबंधों के आगे के घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
पाकिस्तान सरकार के सामने दोहरी चुनौती
पाकिस्तान की सरकार के सामने एक ओर आतंकवादी हिंसा पर नियंत्रण पाने और दूसरी ओर राजनीतिक असंतोष से निपटने की चुनौती है। खैबर पख्तूनख्वा में सेना की तैनाती और गवर्नर शासन तथा कराची में सार्वजनिक जमावड़ों पर रोक का असर आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। इन फैसलों को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के अलग-अलग रुख के बीच सुरक्षा व्यवस्था, नागरिक गतिविधियों और राजनीतिक स्थिरता पर चर्चा तेज हो सकती है। यहां बताए गए घटनाक्रम और आंकड़े उपलब्ध रिपोर्ट में किए गए दावों पर आधारित हैं; आधिकारिक आदेशों और स्वतंत्र पुष्टि के आधार पर इनकी स्थिति की अलग से जांच जरूरी है।








