SC To Hear Lawyers’ Plea: वकीलों की हिरासत और इंटरनेट बंदी पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई

Simran Arora
0 सेकंड पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Ritika Ghosh
4 घंटे पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Shruti Bajpai
5 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Neha Tripathi
6 घंटे पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Aarav Sharma
6 घंटे पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Vaishali shinde
9 घंटे पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Kabir Shukla
10 घंटे पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
वकीलों की हिरासत और इंटरनेट बंदी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान वकीलों की हिरासत, अदालत के कामकाज में बाधा और इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करने की सहमति दी है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से इस मामले को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के सामने उठाया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदालत ने 13 अक्टूबर को मामले पर सुनवाई करने की बात कही है।
अदालत के कामकाज और आवाजाही में बाधा पर चिंता
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण गतिविधियां सुचारू रूप से होनी चाहिए, लेकिन उनकी वजह से सुप्रीम कोर्ट के कामकाज में बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने वकीलों, मुकदमेबाजों और अदालत के कर्मचारियों की आवाजाही निर्बाध बनाए रखने पर जोर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि विरोध-प्रदर्शन के कारण न्यायिक कार्यवाही और उससे जुड़े लोगों की पहुंच प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
SCBA ने वकीलों की परेशानियों का मुद्दा उठाया
SCBA के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील प्रदीप राय ने अदालत को बताया कि दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच वकीलों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने वकीलों की हिरासत और इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए अपनी याचिका पर सुनवाई का अनुरोध किया। वरिष्ठ वकील नाडकर्णी ने भी एक अन्य वकील की ओर से याचिका दायर किए जाने की जानकारी दी।
वकीलों को प्रदर्शन में शामिल होने का अधिकार
विरोध-प्रदर्शनों से संबंधित एक अन्य याचिका का उल्लेख वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने किया। उन्होंने दावा किया कि वरिष्ठ वकीलों को सड़कों पर रोका जा रहा है और पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने धारा 163 के आदेश की सार्वजनिक उपलब्धता पर भी सवाल उठाया। इन आरोपों पर अदालत में सुनवाई होनी बाकी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वकीलों को विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने का अधिकार है, लेकिन इससे अदालत के कामकाज और लोगों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए।
13 अक्टूबर की सुनवाई पर नजर
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत इस मामले पर अगले दिन सुनवाई करेगी और सुप्रीम कोर्ट को विरोध-प्रदर्शन से जुड़े विवादों में अनुचित रूप से घसीटने नहीं दिया जाएगा। याचिकाओं में वकीलों की हिरासत, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और न्यायिक कामकाज तक पहुंच जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। अब सुनवाई के दौरान अदालत इन शिकायतों और संबंधित पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी।








