पीएम केयर्स फंडमें 30 फीसदी की गिरावट: पीएम केयर्स फंड पर फिर बढ़ा राजनीतिक विवाद

Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Ritika Ghosh
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
वित्त वर्ष 2024-25 में पीएम केयर्स फंड को मिलने वाले घरेलू चंदे में करीब 30 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान घरेलू योगदान घटकर ₹479.04 करोड़ रह गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में फंड को ₹681.8 करोड़ का घरेलू चंदा मिला था। यानी एक साल के भीतर घरेलू योगदान में करीब ₹202 करोड़ की कमी आई है। विदेशी योगदान में भी करीब 18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। विदेशी चंदा घटकर ₹92.83 लाख रह जाने की जानकारी रिपोर्ट में सामने आई है।
ब्याज से बढ़कर ₹8,452 करोड़ हुआ फंड
चंदे में कमी के बावजूद पीएम केयर्स फंड की कुल राशि में बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक फंड का कुल बैलेंस ₹8,452.07 करोड़ पहुंच गया। फंड को फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी रकम पर करीब ₹469 करोड़ का ब्याज मिला है। ब्याज से हुई आय ने चंदे में आई कमी के बावजूद कुल राशि को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। इससे फंड में जमा रकम एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई है। विपक्ष अब इतनी बड़ी राशि के इस्तेमाल और उसके प्रबंधन को लेकर सवाल उठा रहा है।
सिर्फ ₹87.85 लाख खर्च होने पर सवाल
ऑडिट रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान फंड से हुए खर्च को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में पीएम केयर्स फंड से केवल ₹87.85 लाख खर्च किए गए। यह राशि फंड के कुल बैलेंस की तुलना में बेहद कम है और करीब 0.01 फीसदी के बराबर बताई जा रही है। विपक्ष और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने इतनी कम राशि खर्च होने पर सरकार से जवाब मांगा है। उनका सवाल है कि जब फंड का उद्देश्य आपात परिस्थितियों में सहायता पहुंचाना है तो बड़ी राशि खर्च क्यों नहीं की गई। इसी मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
एजेंसियों ने ₹324.66 करोड़ लौटाए
पीएम केयर्स फंड की ऑडिट रिपोर्ट में कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा रकम वापस किए जाने का भी उल्लेख है। जानकारी के मुताबिक विभिन्न एजेंसियों ने फंड को करीब ₹324.66 करोड़ वापस किए हैं। इस रकम की वापसी को लेकर विपक्ष और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि वापस किए जाने के कारणों को सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट किया जाना चाहिए। विपक्ष ने यह भी सवाल किया है कि क्या यह रकम किसी परियोजना या खरीद प्रक्रिया से जुड़ी थी। सरकार से इस रिफंड की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है।
विपक्ष ने पारदर्शिता पर उठाए सवाल
ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज समेत विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का सवाल है कि जब देश के अलग-अलग हिस्सों में प्राकृतिक आपदाएं आती हैं तो हजारों करोड़ रुपये की राशि निष्क्रिय क्यों रखी गई है। उन्होंने फंड में जमा राशि के इस्तेमाल और खर्च से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। आरटीआई कार्यकर्ताओं ने फंड को सूचना के अधिकार कानून के दायरे में लाने की मांग भी दोहराई है। विपक्ष का कहना है कि फंड के संचालन और चंदे के स्रोतों को लेकर अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए।
पीएम केयर्स फंड पर फिर बढ़ा राजनीतिक विवाद
पीएम केयर्स फंड की ताजा ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष चंदे में गिरावट के साथ-साथ फंड में जमा बड़ी राशि और कम खर्च को लेकर सरकार से सवाल पूछ रहा है। वहीं सरकार का रुख रहा है कि पीएम केयर्स फंड एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट है और इसका ऑडिट स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा किया जाता है। सरकार के मुताबिक फंड का इस्तेमाल राष्ट्रीय आपात स्थितियों और जरूरत के समय सहायता के लिए किया जाता है। अब घरेलू और विदेशी चंदे में गिरावट तथा फंड के खर्च को लेकर उठे सवालों पर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।







