वंदे मातरम पर सियासी घमासान: वंदे मातरम पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने

Monika Das
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Navya Nair
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Vivaan Gupta
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
'वंदे मातरम' के गायन को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विवाद की शुरुआत 15 अगस्त 2026 को कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सामने आए एक वीडियो को लेकर हुई। इसके बाद 17 अगस्त को गोवा में कांग्रेस के एक कार्यक्रम में वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरे गाए जाने पर भाजपा ने सवाल खड़े किए। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के अपमान का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस ने इसे दशकों से चली आ रही परंपरा बताते हुए भाजपा के आरोपों को खारिज किया। इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है।
भाजपा ने कांग्रेस पर लगाया अपमान का आरोप
गोवा में कांग्रेस के कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरे गाए जाने के बाद भाजपा ने कांग्रेस को निशाने पर लिया। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राष्ट्रीय गीत को लेकर गंभीर नहीं है और जानबूझकर निर्धारित नियमों की अनदेखी कर रही है। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद समेत कई नेताओं ने कांग्रेस से इस मामले में स्पष्टीकरण और माफी की मांग की। भाजपा का कहना है कि संसद में पारित नए संशोधन के बाद राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े नियमों का पालन जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है।
खड़गे ने भाजपा को दिया तीखा जवाब
भाजपा के आरोपों के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस लंबे समय से वंदे मातरम के पहले दो अंतरे गाती रही है। खड़गे ने इसे करीब 80 से 90 साल पुरानी परंपरा बताते हुए कहा कि इसमें कुछ भी नया या अपमानजनक नहीं है। उन्होंने भाजपा के आरोपों पर सवाल उठाते हुए महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल का भी उल्लेख किया। खड़गे ने कहा कि अगर पहले दो अंतरे गाना अपराध है तो सरकार को उन नेताओं के खिलाफ भी FIR दर्ज करनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और ज्यादा तेज हो गया।
कांग्रेस ने ऐतिहासिक परंपरा का दिया हवाला
कांग्रेस ने अपने पक्ष में 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा लिए गए फैसले का हवाला दिया है। पार्टी का कहना है कि उस समय वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरों को सार्वजनिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में गाने के लिए स्वीकार किया गया था। कांग्रेस के मुताबिक दशकों से इसी परंपरा के तहत राष्ट्रीय गीत के पहले दो अंतरे गाए जाते रहे हैं। पार्टी ने कहा कि महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू समेत कई प्रमुख नेताओं के दौर में भी यही परंपरा रही। कांग्रेस का तर्क है कि इस ऐतिहासिक परंपरा को अचानक विवाद का विषय बनाया जा रहा है। पार्टी ने भाजपा पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है।
नए कानून को लेकर भी छिड़ी बहस
इस पूरे विवाद में संसद के मानसून सत्र 2026 में पारित बताए जा रहे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े संशोधन को लेकर भी बहस तेज हो गई है। भाजपा का दावा है कि नए प्रावधानों के तहत वंदे मातरम के सभी छह अंतरों को लेकर नियम स्पष्ट किए गए हैं। वहीं कांग्रेस का कहना है कि पारंपरिक रूप से सार्वजनिक आयोजनों में पहले दो अंतरे ही गाए जाते रहे हैं। दोनों दल अपने-अपने तर्कों के साथ इस मुद्दे को जनता के सामने रख रहे हैं। कानून की व्याख्या और उसके वास्तविक प्रभाव को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और सार्वजनिक मंचों पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
राष्ट्रीय गीत पर सियासत और तेज होने के आसार
वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल गायन तक सीमित नहीं रहा है बल्कि यह कांग्रेस और भाजपा के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन गया है। भाजपा इसे राष्ट्रीय सम्मान और नियमों के पालन से जोड़कर कांग्रेस पर हमला कर रही है। कांग्रेस इसे ऐतिहासिक परंपरा और राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश बता रही है। मल्लिकार्जुन खड़गे के FIR वाले बयान ने इस विवाद को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। दोनों दलों के नेताओं की ओर से लगातार बयान आने के कारण राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में वंदे मातरम को लेकर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है।







