MP Bus Service Returns: MP में 20 साल बाद बस सेवा की वापसी

Taushif Shekh
7 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Reyansh Joshi
7 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Sonu rai
8 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Diya Gupta
8 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Neel Saxena
9 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Payal jadon
10 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Ishaan Tiwari
10 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Aryan Malhotra
11 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Aditya Verma
12 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Nisha Shah
13 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Kavya Mishra
13 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Kavya Mishra
14 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
मध्य प्रदेश में करीब दो दशक से कमजोर पड़ी राज्य स्तरीय सार्वजनिक बस परिवहन व्यवस्था को नए मॉडल के साथ फिर मजबूत करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 11 सितंबर को इंदौर में आयोजित यात्री परिवहन विजन समिट-2026 के उद्घाटन सत्र में घोषणा की कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा की शुरुआत 25 सितंबर 2026 से की जाएगी। सरकार का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, आधुनिक, भरोसेमंद और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।
15 हजार से ज्यादा बसों का नेटवर्क बनाने का लक्ष्य
सरकार ने प्रदेश में सार्वजनिक बस नेटवर्क को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक मध्य प्रदेश में करीब पांच लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है और राज्य में 15 हजार से ज्यादा बसें संचालित करने की क्षमता है। अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार मौजूदा करीब 11 हजार परमिट वाली बसों की संख्या को अगले तीन से चार वर्षों में बढ़ाकर करीब 15 हजार तक ले जाने की योजना है। यानी 15 हजार बसें एक साथ नई खरीदने के बजाय परिवहन नेटवर्क का चरणबद्ध विस्तार किया जाएगा।
PPP मॉडल पर चलेगी सुगम परिवहन सेवा
नई व्यवस्था में सरकार और निजी क्षेत्र की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर विकसित करने की योजना है। मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड यानी MPYPIL के माध्यम से व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निजी बस ऑपरेटरों, वाहन निर्माताओं और उद्योग जगत से इस मॉडल में भागीदारी का आह्वान किया है।
भोपाल और इंदौर से होगी शुरुआती शुरुआत
नई बस सेवा का शुरुआती पायलट संचालन भोपाल और इंदौर में किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद दूसरे शहरों और फिर प्रदेश के सभी जिलों तक व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा। परिवहन विभाग ने 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट रूट का सर्वे पूरा किया है। डेटा के आधार पर रूट प्लानिंग की जाएगी, ताकि यात्रियों की वास्तविक जरूरत के अनुसार बस सेवाएं विकसित की जा सकें।
CCTV, GPS और पैनिक बटन से बढ़ेगी सुरक्षा
सुगम परिवहन सेवा में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में बसों की निगरानी के लिए CCTV, GPS, लाइव लोकेशन, पैनिक बटन और ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। परिवहन विभाग ने इलेक्ट्रिक और CNG बसों को प्राथमिकता देने की बात भी कही है। इससे यात्रियों की सुरक्षा के साथ बस संचालन की निगरानी और समयबद्धता को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
2030 तक 75% ग्राम पंचायतों को जोड़ने का लक्ष्य
सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य सार्वजनिक परिवहन को शहरों तक सीमित न रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना है। योजना के तहत 2030 तक राज्य की करीब 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे गांवों से शहरों तक आने-जाने वाले यात्रियों, छात्रों, कामगारों और ग्रामीण कारोबारियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि इस विस्तार से सार्वजनिक परिवहन के साथ रोजगार और निवेश के अवसर भी बढ़ सकते हैं।







