बंगाल में 'शहीद दिवस' पर तीन तरफा शक्ति प्रदर्शन: शहीद दिवस पर बंगाल की सियासत में महासंग्राम

Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेYeh rajneeti ka asli chehra hai.
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Arjun Singh
0 सेकंड पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Riya Jain
0 सेकंड पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Navya Nair
0 सेकंड पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेYeh rajneeti ka asli chehra hai.
Ananya Sharma
1 घंटे पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
इतिहास में पहली बार तीन अलग-अलग 'शहीद दिवस' कार्यक्रम
पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई को मनाया जाने वाला 'शहीद दिवस' इस बार ऐतिहासिक बन गया। वर्ष 1993 में तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार की पुलिस फायरिंग में मारे गए 13 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की स्मृति में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में पहली बार तृणमूल कांग्रेस (TMC), बागी TMC गुट और कांग्रेस ने अलग-अलग रैलियों का आयोजन किया। विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के कारण कोलकाता में तीन अलग-अलग शक्ति प्रदर्शन देखने को मिले।
बिरला तारामंडल पर ममता बनर्जी की रैली
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला आधिकारिक TMC गुट इस बार बिरला तारामंडल (Birla Planetarium) के सामने सभा कर रहा है। पारंपरिक आयोजन स्थल पर अनुमति नहीं मिलने के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां से सशर्त अनुमति मिली। अदालत ने सुरक्षा कारणों से रैली में अधिकतम 2,500 लोगों के शामिल होने की सीमा तय की है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी हार और पार्टी में बगावत के बाद यह रैली ममता बनर्जी के जनाधार की बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।
मेयो रोड पर बागी TMC गुट का शक्ति प्रदर्शन
TMC से अलग हुए ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट मेयो रोड स्थित गांधी मूर्ति के सामने समानांतर रैली आयोजित कर रहा है। इस गुट का दावा है कि उसे पार्टी के कई विधायकों और नेताओं का समर्थन प्राप्त है। वहीं, काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाला एक अन्य बागी धड़ा दिल्ली के राजघाट पर अलग प्रदर्शन कर रहा है। इन आयोजनों ने बंगाल की राजनीति में TMC के भीतर जारी संघर्ष को खुलकर सामने ला दिया है।
कांग्रेस ने शहीद मीनार से किया शक्ति प्रदर्शन
प्रदेश कांग्रेस कमेटी (WBPCC) के अध्यक्ष सुभंकर सरकार के नेतृत्व में कांग्रेस ने शहीद मीनार पर बड़ी सभा आयोजित की। कांग्रेस का कहना है कि 1993 की पुलिस फायरिंग में मारे गए सभी 13 लोग मूल रूप से युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता थे, इसलिए इस दिवस पर उनका भी नैतिक और ऐतिहासिक अधिकार है। पार्टी इसे बंगाल में अपनी राजनीतिक वापसी के अवसर के रूप में देख रही है।
हाई कोर्ट की अनुमति के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम
तीनों रैलियों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रखी गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट की अनुमति के बाद अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कोलकाता पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में BNSS की धारा 163 लागू करते हुए भारी पुलिस बल, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था की है ताकि किसी भी प्रकार की झड़प या कानून-व्यवस्था की समस्या न हो।
बंगाल की राजनीति के लिए अहम संकेत
इस बार का 'शहीद दिवस' केवल श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीति का बड़ा शक्ति प्रदर्शन बन गया है। एक ओर ममता बनर्जी अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं, दूसरी ओर बागी TMC गुट अपनी ताकत दिखा रहा है, जबकि कांग्रेस खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने का प्रयास कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन रैलियों की भीड़ और जनसमर्थन आने वाले समय में बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।







