चार दिवसीय विदेश दौरे पर पीएम मोदी: SCO समिट में होंगे शामिल

Monika Das
7 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Vivaan Gupta
8 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Ravi sinha
10 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Nisha Shah
11 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Anil Sen
12 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Anil Sen
14 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
चार दिवसीय विदेश दौरे पर पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को चार दिवसीय विदेश यात्रा के लिए रवाना हो गए हैं। उनकी यात्रा 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक प्रस्तावित है, जिसमें उज्बेकिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य का दौरा शामिल है। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना बताया जा रहा है। दौरे के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री इस दौरान क्षेत्रीय सहयोग और भारत की कनेक्टिविटी परियोजनाओं से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दे सकते हैं। यात्रा का सबसे अहम पड़ाव किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाला शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO का शिखर सम्मेलन होगा।
उज्बेकिस्तान में द्विपक्षीय वार्ता पर फोकस
विदेश यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचेंगे। यहां उनकी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच भारत और उज्बेकिस्तान के मौजूदा संबंधों की समीक्षा के साथ भविष्य के सहयोग को लेकर चर्चा होने की संभावना है। बैठक में व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर बातचीत हो सकती है। ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों पर भी विचार किया जा सकता है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना इस यात्रा के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में शामिल बताया जा रहा है।
रक्षा और व्यापार समझौतों पर रहेगी नजर
प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत होने की संभावना है। इनमें व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को विस्तार देने के लिए नए व्यापारिक अवसरों और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है। रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा डिजिटल तकनीक और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा सकता है। संभावित समझौतों और घोषणाओं पर भारत तथा उज्बेकिस्तान के रणनीतिक संबंधों के लिहाज से विशेष नजर रहेगी।
किर्गिस्तान में SCO शिखर सम्मेलन
यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचेंगे, जहां 26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन का आयोजन होना है। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और SCO देशों के नेताओं के साथ क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। सम्मेलन में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने का मुद्दा प्रमुख रह सकता है। इसके साथ ही आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा देने के रास्तों पर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत के लिए मध्य एशिया के साथ बेहतर संपर्क और रणनीतिक सहयोग इस सम्मेलन के महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल रहेंगे। प्रधानमंत्री भारत के क्षेत्रीय हितों और सुरक्षा प्राथमिकताओं को मंच पर मजबूती से रखने की कोशिश करेंगे।
चाबहार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर जोर
मध्य एशिया के साथ भारत के संबंधों में कनेक्टिविटी का मुद्दा लगातार महत्वपूर्ण रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के दौरान चाबहार बंदरगाह के माध्यम से मध्य एशियाई देशों तक भारत की पहुंच बढ़ाने पर भी चर्चा हो सकती है। चाबहार को भारत के लिए मध्य एशिया और उससे आगे के बाजारों तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ रणनीतिक संपर्क भी मजबूत हो सकता है। भारत SCO के मंच पर आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ाने की अपनी प्राथमिकताओं को सामने रख सकता है। इस यात्रा के दौरान मध्य एशिया के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है।
वैश्विक नेताओं से मुलाकात की संभावना
SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें भी हो सकती हैं। इन बैठकों में भारत के द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा की संभावना है। यूरेशियाई क्षेत्र में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच भारत अपने आर्थिक और सुरक्षा हितों को लेकर विभिन्न देशों के साथ संवाद बढ़ाना चाहता है। रूस-यूक्रेन संघर्ष समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी नेताओं की बातचीत में शामिल हो सकते हैं। प्रधानमंत्री की बैठकों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के अवसरों पर भी चर्चा संभव है। चार दिवसीय यात्रा के दौरान भारत की कूटनीतिक सक्रियता और मध्य एशिया के साथ रणनीतिक साझेदारी पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।







