Tribal Student Dies in Bhiwandi: महाराष्ट्र के आश्रम स्कूल में 11 वर्षीय छात्र विवेक भोये की मौत

Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Kabir Shukla
0 सेकंड पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Diya Gupta
0 सेकंड पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
Reyansh Joshi
32 मिनट पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
Trapti Tanwar
50 मिनट पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Payal jadon
1 घंटे पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
Simran Arora
2 घंटे पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Aarav Sharma
3 घंटे पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
आश्रम स्कूल के 11 वर्षीय छात्र की मौत से आक्रोश
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भिवंडी तालुका के पिसे स्थित आदिवासी आश्रम स्कूल में पढ़ने वाले 11 वर्षीय छात्र विवेक सुभाष भोये की मौत के बाद परिजनों और आदिवासी संगठनों में नाराजगी है। रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा पांचवीं के छात्र की शहापुर उपजिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने स्कूल के मुख्याध्यापक और शिक्षकों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, मौत के कारण और कथित लापरवाही की जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
आदिवासी परियोजना अधिकारी कार्यालय के सामने धरना
छात्र की मौत से नाराज परिजन और आदिवासी संगठनों के सदस्य शहापुर स्थित आदिवासी परियोजना अधिकारी कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि स्कूल के मुख्याध्यापक और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। परिजनों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, वे धरना समाप्त नहीं करेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन परिवार अपनी मांग पर कायम रहा।
शिक्षकों पर लापरवाही के गंभीर आरोप
परिजनों का आरोप है कि छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे उपचार के लिए शहापुर उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन अस्पताल में बच्चे को छोड़कर स्कूल के शिक्षक कथित तौर पर वहां से चले गए। परिवार ने इसे लापरवाही बताते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ये आरोप परिजनों की ओर से लगाए गए हैं; उपलब्ध जानकारी में शिक्षकों का पक्ष या आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। मामले में निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि छात्र को समय पर उचित चिकित्सा सहायता मिली या नहीं और घटना के दौरान स्कूल प्रबंधन की क्या भूमिका रही।
कार्रवाई और जवाबदेही की मांग
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, जब वे अपनी शिकायत लेकर आदिवासी परियोजना अधिकारी कार्यालय पहुंचे, तो वहां कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। इससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई। परिजनों और आदिवासी संगठनों ने मांग की है कि शिकायत पर औपचारिक कार्रवाई की जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्ट में FIR दर्ज होने या जांच के निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे मामलों में छात्र की मौत के कारणों की जांच, अस्पताल और स्कूल से जुड़े तथ्यों की पड़ताल तथा संबंधित पक्षों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।






