Haridwar Ganga Canal Closure: हरिद्वार में गंगनहर बंद होते ही खजाने की तलाश, सिक्कों से लेकर सोने-चांदी के गहनों तक की खोज

Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेDharm aur aastha hi insaan ko sahi raah dikhati hai.
Neel Saxena
0 सेकंड पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
Nisha Shah
1 घंटे पहलेYeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!
Anika Rajput
3 घंटे पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Reyansh Joshi
4 घंटे पहलेDharm aur aastha hi insaan ko sahi raah dikhati hai.
हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगनहर का पानी कम होते ही घाटों पर एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर गंगा स्नान करने पहुंचे श्रद्धालु पानी की कमी से निराश हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग सूखी नहर और घाटों की रेत में सिक्के, धातु की वस्तुएं और कीमती आभूषण तलाशने में जुटे हैं। कोई हाथों से रेत हटाकर खोजबीन कर रहा है, तो कोई पत्थरों के बीच बारीकी से सिक्के ढूंढ रहा है। कई लोग रोजाना 8-8 घंटे तक इस उम्मीद में मेहनत करते हैं कि उन्हें कुछ ऐसा मिल जाए, जिसे बेचकर परिवार का खर्च चलाया जा सके।
क्यों बंद की गई गंगनहर?
हरिद्वार से उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली गंगनहर को हर साल सफाई और मरम्मत के लिए कुछ समय के लिए बंद किया जाता है। इस साल भी 20 अक्टूबर की रात से गंगनहर की वार्षिक बंदी शुरू हुई है। इस दौरान नहर की तलहटी में जमा गाद हटाने, क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और घाटों से जुड़े निर्माण कार्यों को पूरा किया जा रहा है। आगामी अर्धकुंभ की तैयारियों को देखते हुए भी कई कार्य किए जा रहे हैं।
गंगनहर की बंदी के कारण हर की पौड़ी समेत कई स्थानों पर पानी का प्रवाह काफी कम हो गया है। जारी कार्यक्रम के अनुसार, नहर में 7 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद पानी छोड़े जाने की उम्मीद है। इसके बाद जलप्रवाह सामान्य होने की प्रक्रिया शुरू होगी।
पानी कम होते ही शुरू हो जाती है खजाने की तलाश
गंगा में श्रद्धालु सालभर पूजा-पाठ और धार्मिक आस्था के चलते सिक्के तथा दूसरी वस्तुएं अर्पित करते हैं। सामान्य दिनों में पानी की तेज धारा के कारण इन वस्तुओं को ढूंढना मुश्किल होता है। लेकिन जब गंगनहर बंद होती है और कई हिस्सों में पानी कम हो जाता है, तो नदी की तलहटी और रेत में फंसी वस्तुओं को तलाशने का मौका मिल जाता है।
इसी वजह से हरिद्वार के हर की पौड़ी स्थित ब्रह्मकुंड घाट, अस्थि प्रवाह घाट, नाई घाट, सुभाष घाट और मालवीय घाट के आसपास लोग खोजबीन करते नजर आ रहे हैं। वे रेत, कीचड़ और पत्थरों के बीच सावधानी से सिक्के और दूसरी धातुओं की वस्तुएं ढूंढते हैं
किसी को सिक्के, तो किसी को मिलते हैं कीमती आभूषण
खोजबीन में जुटे लोगों को तांबे, पीतल और अन्य धातुओं की वस्तुओं के साथ अलग-अलग मूल्य के सिक्के भी मिलते हैं। कुछ लोगों का दावा है कि कभी-कभी सोने और चांदी के आभूषण भी मिल जाते हैं। हालांकि, हर दिन की तलाश में कीमती सामान मिलना तय नहीं है। कई बार घंटों मेहनत करने के बाद भी लोगों को केवल कुछ सिक्के या कम मूल्य की वस्तुएं ही मिल पाती हैं।
यह काम मेहनत के साथ-साथ किस्मत पर भी निर्भर करता है। किसी को थोड़ी-बहुत कमाई होती है, तो किसी को कोई कीमती वस्तु मिलने से ज्यादा फायदा हो जाता है।
कई परिवारों के लिए रोजगार का साधन
गंगनहर की वार्षिक बंदी कुछ लोगों के लिए कमाई का खास अवसर बन जाती है। कई लोग और परिवार हर साल इस अवधि का इंतजार करते हैं। वे सुबह से शाम तक नदी की तलहटी में वस्तुएं तलाशते हैं और मिलने वाले सिक्कों व धातुओं को बेचकर घरेलू खर्च चलाने की कोशिश करते हैं।
हरिद्वार में यह गतिविधि कुछ परिवारों की आजीविका से भी जुड़ी है। गंगनहर में दोबारा पानी आने के बाद तलहटी में उतरकर इस तरह वस्तुएं तलाशना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए लोग बंदी के दौरान ज्यादा से ज्यादा सामान खोजने की कोशिश करते हैं।
श्रद्धालुओं को गंगा स्नान में हो रही परेशानी
गंगनहर बंद होने का दूसरा पहलू भी सामने आया है। हरिद्वार के हर की पौड़ी पर गंगा स्नान की इच्छा लेकर पहुंच रहे श्रद्धालुओं को पर्याप्त पानी नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई श्रद्धालु निराश होकर लौट रहे हैं, जबकि कुछ लोग उपलब्ध पानी से ही आचमन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।
हर की पौड़ी पर पर्याप्त जलप्रवाह बनाए रखने को लेकर भी चिंता जताई गई है। वहीं, संबंधित विभाग नहर की सफाई, मरम्मत और अन्य जरूरी कार्यों में जुटा है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, नवंबर की शुरुआत में पानी दोबारा छोड़े जाने के बाद घाटों पर स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।
गंगा की तलहटी में छिपी हैं लोगों की उम्मीदें
हरिद्वार में गंगनहर की वार्षिक बंदी के दौरान एक ही जगह दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। एक ओर श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पानी का इंतजार कर रहे हैं, तो दूसरी ओर स्थानीय लोग और अन्य खोजकर्ता सूखी तलहटी में सिक्कों व धातुओं की तलाश कर रहे हैं। किसी के लिए यह धार्मिक यात्रा में आई परेशानी है, तो किसी के लिए परिवार का खर्च चलाने का मौका।
अब लोगों की नजर इस बात पर है कि गंगनहर में पानी लौटने से पहले उन्हें कितनी वस्तुएं मिल पाती हैं।








