India Approves E100 Fuel: सरकार ने E100 फ्यूल को दी मंजूरी, जानें E20 से अंतर

Nidhi kumari
9 घंटे पहलेTech world mein itna bada change aane wala hai.
Priya Iyer
10 घंटे पहलेCyber security ka yeh mudda bahut serious hai.
Kavya Mishra
11 घंटे पहलेYeh innovation aam logon ke bahut kaam aayega.
Vaishali shinde
12 घंटे पहलेYeh innovation aam logon ke bahut kaam aayega.
Shruti Bajpai
13 घंटे पहलेTech world mein itna bada change aane wala hai.
Navya Nair
14 घंटे पहलेArtificial Intelligence ab aur tezi se aage badh raha hai.
Sneha Menon
15 घंटे पहलेCyber security ka yeh mudda bahut serious hai.
सरकार ने E100 फ्यूल को दी मंजूरी
भारत सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में E100 ईंधन के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 23 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की, जिसे 26 अक्टूबर को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इसके साथ केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में बदलाव किए गए हैं। इस कदम से भविष्य में एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा मिल सकता है और पेट्रोल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
क्या है E100 फ्यूल?
E100 ऐसा ईंधन है, जिसमें लगभग 100 प्रतिशत एथेनॉल होता है। एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे गन्ने, मक्का और दूसरे कृषि उत्पादों से बनाया जा सकता है। इसकी तुलना में E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। दोनों ईंधनों में मुख्य अंतर एथेनॉल की मात्रा और उन्हें इस्तेमाल करने के लिए जरूरी वाहन तकनीक का है।
E10, E20, E85 और E100 में क्या अंतर है?
इन ईंधनों के नाम में मौजूद संख्या एथेनॉल के लगभग प्रतिशत को दर्शाती है। E10 में करीब 10 प्रतिशत, E20 में 20 प्रतिशत और E85 में लगभग 85 प्रतिशत एथेनॉल होता है। वहीं, E100 में लगभग शुद्ध एथेनॉल होता है। अधिक एथेनॉल वाले ईंधन के इस्तेमाल के लिए वाहन का इंजन और फ्यूल सिस्टम उसी के अनुरूप तैयार होना जरूरी है।
क्या सामान्य पेट्रोल कार में E100 डल सकता है?
नहीं, सामान्य पेट्रोल कारों में सीधे E100 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। नए नियमों के अनुसार, E85 और E100 का उपयोग उन वाहनों में किया जा सकता है, जिन्हें निर्माता खास तौर पर एथेनॉल वाले ईंधन के लिए तैयार करते हैं। ऐसे वाहनों को फ्लेक्स-फ्यूल वाहन कहा जाता है। इनके इंजन, फ्यूल सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि वे अलग-अलग मात्रा वाले एथेनॉल ईंधन पर चल सकें। सामान्य पेट्रोल कार में E100 डालने से फ्यूल सिस्टम के पुर्जों को नुकसान पहुंच सकता है और इंजन के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।
कार कंपनियों के लिए क्या बदलेगा?
नए नियम वाहन निर्माता कंपनियों को E100 पर चलने वाले वाहनों की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के लिए नियामकीय आधार देते हैं। इससे भविष्य में फ्लेक्स-फ्यूल कारों को भारत में पेश करने का रास्ता आसान हो सकता है। मंत्रालय ने उत्सर्जन जांच से जुड़े कुछ प्रावधानों में बदलाव करते हुए संबंधित वाहनों के वजन की सीमा 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दी है। हालांकि, सरकार ने अभी पूरे देश में E100 की बिक्री शुरू करने की घोषणा नहीं की है। इस ईंधन पर चलने वाली कारों की कीमत को लेकर भी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
क्या E100 से कार चलाना सस्ता होगा?
फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि E100 से कार चलाने का खर्च कम होगा या नहीं। एथेनॉल में प्रति लीटर पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा होती है, इसलिए समान दूरी तय करने के लिए अधिक ईंधन की जरूरत पड़ सकती है। वास्तविक खर्च E100 की कीमत, वाहन की माइलेज और ईंधन की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। इसलिए केवल एथेनॉल की मात्रा अधिक होने से यह तय नहीं किया जा सकता कि वाहन चलाना सस्ता पड़ेगा।
E100 फ्यूल से क्या होंगे फायदे?
E100 को बढ़ावा मिलने से कृषि उत्पादों से बनने वाले वैकल्पिक ईंधन की मांग बढ़ सकती है। इससे पेट्रोल के आयात पर निर्भरता घटाने और ऊर्जा के स्रोतों में विविधता लाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके वास्तविक फायदे ईंधन की उपलब्धता, कीमत, वाहन तकनीक और देश में इसके वितरण की व्यवस्था पर निर्भर करेंगे।








