पैलेट गन इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब: जंतर-मंतर पैलेट गन मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

Kabir Shukla
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Aditya Verma
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Anil Sen
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Vihaan Patel
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Saanvi Pandey
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Riya Jain
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Ananya Sharma
2 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Neha Tripathi
3 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Anjali Patil
3 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Ayaan Khan
3 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Harsh Pandya
3 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Saanvi Pandey
3 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Ananya Sharma
4 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Aarohi Chaudhary
5 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Pranav Srivastava
5 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Vihaan Patel
5 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Monika Das
5 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Nisha Shah
6 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Aditya Verma
6 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Neha Tripathi
6 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Aarav Sharma
6 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Arjun Singh
6 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Myra Dubey
7 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू कर दी है। अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए भीड़ नियंत्रण में पैलेट गन के उपयोग से संबंधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर आगे की सुनवाई की जाएगी। यह मामला देशभर में कानून-व्यवस्था और नागरिक अधिकारों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
याचिका में प्रतिबंध और मुआवजे की मांग
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद तथा प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में नागरिक प्रदर्शनों के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और घायलों को उचित मुआवजा देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भीड़ नियंत्रण के दौरान ऐसे हथियारों से गंभीर शारीरिक नुकसान हो सकता है। अदालत ने सभी पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा है।
कोर्ट ने SOP और गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि घटना के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के गोला-बारूद का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने पूछा कि पैलेट गन के उपयोग के लिए मौजूदा दिशा-निर्देश और प्रक्रिया क्या है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा कि किन परिस्थितियों में ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है। रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का उद्देश्य भविष्य की न्यायिक जांच को पारदर्शी बनाना है।
पूर्ण प्रतिबंध पर फिलहाल नहीं जताई सहमति
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को परिस्थितियों के अनुसार चरणबद्ध बल प्रयोग (Graded Use of Force) का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने संकेत दिया कि असाधारण और अत्यधिक हिंसक परिस्थितियों में पैलेट गन के उपयोग की अनुमति नियमों के तहत हो सकती है। हालांकि अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश और जवाबदेही आवश्यक है। अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई के बाद लिया जाएगा।
घायलों के इलाज को लेकर दिल्ली सरकार को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों और अन्य प्रभावित लोगों के इलाज को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। अदालत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि सभी घायलों को सरकारी अस्पतालों में निशुल्क और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। कोर्ट ने कहा कि उपचार में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही सरकार से पीड़ितों की स्थिति पर रिपोर्ट भी मांगी गई है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा पूरा विवाद
20 जुलाई 2026 को नीट पेपर लीक के विरोध में छात्र संगठनों द्वारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने के बाद सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। इसी दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप सामने आए, जिसमें कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की बात कही गई। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है और केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा गया है।








