येरवडा जेल में गांजा तस्करी की कोशिश नाकाम: मेटल डिटेक्टर ने खोली शातिर कैदी की पोल

Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Anil Sen
0 सेकंड पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Aarav Sharma
0 सेकंड पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Simran Arora
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Nisha Shah
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Diya Gupta
0 सेकंड पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Aditya Verma
1 मिनट पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Ritika Ghosh
1 घंटे पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Ada khan
2 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Navya Nair
2 घंटे पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
महाराष्ट्र के पुणे स्थित येरवडा सेंट्रल जेल में सुरक्षा जांच के दौरान एक विचाराधीन कैदी की गांजा तस्करी की कोशिश नाकाम हो गई। 18 जुलाई को दोपहर करीब 12:30 बजे कोर्ट में पेशी के बाद जेल लौटे आरोपी की नियमित जांच के दौरान मेटल डिटेक्टर का अलार्म बज गया, जिसके बाद पूरी घटना का खुलासा हुआ।
मेटल डिटेक्टर ने बढ़ाया शक, पूछताछ में किया खुलासा
जेल के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहले आरोपी की सामान्य शारीरिक तलाशी (Frisking) ली गई, लेकिन उसके पास से कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। इसके बाद जब वह मेटल डिटेक्टर से गुजरा तो लगातार अलार्म बजने लगा। दोबारा तलाशी लेने पर भी कुछ नहीं मिला, जिससे जेल अधिकारियों का शक और गहरा गया। कड़ी पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने करीब 11 ग्राम गांजा सिल्वर फॉयल में लपेटकर अपने मलाशय (Rectum) में छिपा रखा था।
सिल्वर फॉयल बनी पकड़े जाने की वजह
पुलिस के अनुसार, सामान्यतः गांजा जैसे जैविक पदार्थ मेटल डिटेक्टर की पकड़ में नहीं आते। लेकिन आरोपी ने गांजे को सिल्वर (एल्यूमिनियम) फॉयल में लपेटा था। यही धातु मेटल डिटेक्टर के संपर्क में आने पर अलार्म बजने का कारण बनी और उसकी तस्करी की योजना विफल हो गई।
आरोपी पर पहले से दर्ज हैं गंभीर मामले
पुलिस ने आरोपी की पहचान हडपसर निवासी निहाल सिंह मुनासिंग टाक के रूप में की है। वह एक आदतन अपराधी बताया जा रहा है। उसके खिलाफ पहले भी कई गंभीर मामले दर्ज हैं।
2022: पुलिस टीम पर फायरिंग का आरोप।
2024: एक सहायक पुलिस निरीक्षक (API) पर दरांती से हमला करने का मामला।
NDPS एक्ट के तहत नया मामला दर्ज
येरवडा जेल प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जेल नियमों के उल्लंघन और NDPS एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत नया मामला दर्ज किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी को कोर्ट परिसर या रास्ते में मादक पदार्थ किसने उपलब्ध कराया और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो नहीं था
जेल सुरक्षा व्यवस्था की सतर्कता से नाकाम हुई तस्करी
इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि जेलों में आधुनिक सुरक्षा उपकरण कितने प्रभावी साबित हो सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि मेटल डिटेक्टर समय रहते अलर्ट न करता, तो प्रतिबंधित मादक पदार्थ जेल परिसर के अंदर पहुंच सकता था। मामले की विस्तृत जांच जारी है और संबंधित सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।








