₹290 करोड़ के बैंक फ्रॉड मामले में ED की कार्रवाई: कोहिनूर पावर पर ED का शिकंजा

कोहिनूर पावर पर ED का शिकंजा
प्रतिक्रियाएँ
Kunal Rao

Kunal Rao

1 दिन पहले

CBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.

Trapti Tanwar

Trapti Tanwar

1 दिन पहले

Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

Sai Mehta

Sai Mehta

1 दिन पहले

CBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.

Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

1 दिन पहले

Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

Monika Das

Monika Das

1 दिन पहले

Society ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.

Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

1 दिन पहले

Gawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.

Vihaan Patel

Vihaan Patel

1 दिन पहले

Gawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.

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प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने ₹290 करोड़ के कथित बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में कोलकाता में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम यानी PMLA के तहत कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ जांच के तहत 11 अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई कंपनी के प्रमोटरों, निदेशकों और अन्य संबंधित लोगों से जुड़े परिसरों पर की गई है। एजेंसी की टीमों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस के सहयोग से विभिन्न स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान वित्तीय लेनदेन और कंपनी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।


66 मेगावाट पावर प्लांट के लिए लिया गया था लोन
जांच से जुड़े आरोपों के अनुसार कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड ने झारखंड में 66 मेगावाट का कैप्टिव बायोमास आधारित पावर प्लांट स्थापित करने के लिए बैंकों के एक कंसोर्टियम से करीब ₹290 करोड़ का कर्ज लिया था। आरोप है कि लोन से प्राप्त रकम का इस्तेमाल प्रस्तावित पावर प्लांट की स्थापना के लिए पूरी तरह नहीं किया गया। जांच एजेंसी को कथित तौर पर ऐसे वित्तीय लेनदेन मिले हैं जिनमें रकम को समूह की अन्य कंपनियों में ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है। अब ED इन लेनदेन के जरिए धन के कथित डायवर्जन और उसके अंतिम इस्तेमाल की जांच कर रही है।


प्रमोटरों पर रकम डायवर्ट करने का आरोप
ED की जांच का एक अहम हिस्सा कंपनी के प्रमोटरों और उससे जुड़ी संस्थाओं के बीच हुए वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक से प्राप्त लोन की रकम को दूसरी संबंधित कंपनियों में भेजने के साथ-साथ प्रमोटरों के निजी उपयोग से जुड़ी संपत्तियों और खर्चों में भी इस्तेमाल किया गया। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लोन की राशि किन-किन खातों और कंपनियों के माध्यम से ट्रांसफर हुई और इसका वास्तविक उपयोग किस उद्देश्य से किया गया। तलाशी के दौरान वित्तीय रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य संभावित सबूतों की जांच की जा रही है।

 

NCLT लिक्विडेशन में सिर्फ ₹7 करोड़ की वसूली
कंपनी के खिलाफ वित्तीय संकट बढ़ने के बाद मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी NCLT की लिक्विडेशन प्रक्रिया तक पहुंचा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार लिक्विडेशन के दौरान लेनदारों को करीब ₹7 करोड़ ही वापस मिल सके, जबकि बैंक लोन की राशि लगभग ₹290 करोड़ बताई गई है। इस वजह से बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को भारी नुकसान होने का दावा किया गया है। ED अब यह जांच कर रही है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति किस तरह बिगड़ी और लोन की रकम का कथित तौर पर डायवर्जन किस तरीके से किया गया। जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।


प्रमोटरों और ऑडिटरों के परिसरों पर भी तलाशी
ED की कार्रवाई का दायरा केवल कंपनी के कार्यालयों तक सीमित नहीं रहा। एजेंसी ने कोहिनूर पावर से जुड़े प्रमोटरों प्रशांत बोथरा और विजय बोथरा के परिसरों के अलावा अन्य निदेशकों और कंपनी के वित्तीय मामलों से जुड़े ऑडिटरों के कार्यालयों पर भी तलाशी ली। जांच टीमों ने कथित बैंक फ्रॉड से जुड़े कागजात, अकाउंटिंग रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय लेनदेन से संबंधित सामग्री की जांच की। तलाशी का उद्देश्य कथित मनी ट्रेल को समझना और बैंक से प्राप्त रकम के इस्तेमाल से जुड़े सबूत जुटाना बताया जा रहा है।


जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
कोहिनूर पावर मामले में ED की यह कार्रवाई कथित बैंक लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच का हिस्सा है। फिलहाल एजेंसी 11 ठिकानों पर तलाशी लेकर कंपनी, प्रमोटरों, निदेशकों और ऑडिटरों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है। बरामद दस्तावेजों और डिजिटल सामग्री के विश्लेषण के बाद कथित धन के लेनदेन और उसके इस्तेमाल को लेकर आगे की तस्वीर सामने आ सकती है। मामले में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और संबंधित पक्षों का पक्ष तथा जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

 

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Kunal Rao

Kunal Rao

1 दिन पहले

CBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.

Trapti Tanwar

Trapti Tanwar

1 दिन पहले

Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

Sai Mehta

Sai Mehta

1 दिन पहले

CBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.

Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

1 दिन पहले

Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

Monika Das

Monika Das

1 दिन पहले

Society ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.

Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

1 दिन पहले

Gawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.

Vihaan Patel

Vihaan Patel

1 दिन पहले

Gawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.

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