One Crore Bribery Allegation: भोपाल में शराब ठेकों के बदले एक करोड़ रुपये लेने का आरोप, OSD ने किया खंडन

Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Ayaan Khan
53 मिनट पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Kabir Shukla
1 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Myra Dubey
2 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Kunal Rao
4 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Myra Dubey
5 घंटे पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Pranav Srivastava
5 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
भोपाल में शराब ठेकों के बदले एक करोड़ रुपये लेने का आरोप
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचूरा पर भोपाल में शराब दुकानों के ठेके दिलाने के बदले कथित तौर पर एक करोड़ रुपये लेने का आरोप सामने आया है। यह आरोप करीब 930 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में आरोपी मोहित गोगिया के नाम से सामने आए एक कथित बयान में लगाया गया है। मामले में शराब दुकानों के ठेकों से संबंधित प्रक्रिया में मदद करने, बैंक गारंटी के लिए कथित तौर पर फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (FDR) के इस्तेमाल और बिना लाइसेंस शराब उपलब्ध कराने में सहयोग जैसे दावे भी किए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें जांच में साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, दीपम रायचूरा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा और निराधार बताया है।
टीटी नगर की दो शराब दुकानों के ठेकों से जुड़ा मामला
मोहित गोगिया के कथित बयान के अनुसार, वर्ष 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों के ठेके जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में मदद की गई थी। आरोप है कि इस प्रक्रिया के बदले एक करोड़ रुपये का भुगतान किया गया और इसमें दीपम रायचूरा की भूमिका होने का दावा किया गया। यह मामला सरकारी शराब दुकानों के आवंटन, ठेका प्रक्रिया में पारदर्शिता और आबकारी विभाग के रिकॉर्ड की जांच से जुड़े सवाल खड़े करता है। हालांकि, कथित बयान में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता का पता संबंधित दस्तावेजों, ठेका आवंटन के रिकॉर्ड और किसी भी संभावित वित्तीय लेन-देन के सत्यापन से ही चल सकेगा।
50 लाख रुपये नकद और 50 लाख रुपये ट्रांसफर करने का दावा
कथित बयान में एक करोड़ रुपये के भुगतान का विवरण भी दिया गया है। आरोप के मुताबिक, इसमें से 50 लाख रुपये नकद दिए गए थे और यह रकम दीपक दुबे के माध्यम से होशंगाबाद रोड स्थित शालीमार फोर्टलेजा के एक फ्लैट से लिए जाने का दावा किया गया है। शेष 50 लाख रुपये आईएसबीटी क्षेत्र के एक होटल संचालक के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाने की बात कही गई है। फिलहाल, इन कथित लेन-देन की स्वतंत्र पुष्टि करने वाले दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए भुगतान से संबंधित इन विवरणों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि प्रमाणित वित्तीय लेन-देन के रूप में।
दीपक दुबे और तनुज सेठी का भी कथित बयान में उल्लेख
कथित बयान के अनुसार, तनुज सेठी के माध्यम से मोहित गोगिया की मुलाकात दीपम रायचूरा से हुई थी। इसके बाद रायचूरा ने गोगिया का परिचय दीपक दुबे से कराया और कथित तौर पर बताया कि वे उनका काम देखते हैं। बयान में आगे दावा किया गया है कि भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया में दीपक दुबे की भूमिका थी। इन दावों में जिन व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकती है। केवल किसी कथित बयान में नाम आने से किसी व्यक्ति की संलिप्तता या अपराध सिद्ध नहीं होता।
फर्जी FDR और बिना लाइसेंस शराब उपलब्ध कराने के आरोप
मामले में कथित रिश्वत के अलावा बैंक गारंटी के लिए फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (FDR) के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है। कथित बयान में दावा किया गया है कि इन दस्तावेजों को मंजूरी दिलाने में मदद की गई और शराब दुकानों के संचालन के दौरान बिना लाइसेंस शराब उपलब्ध कराने में भी सहयोग किया गया। यदि इन आरोपों की जांच होती है, तो संबंधित बैंक रिकॉर्ड, आबकारी विभाग के दस्तावेज, लाइसेंस संबंधी जानकारी और ठेका आवंटन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि करने वाले निष्कर्ष अभी उपलब्ध जानकारी से स्थापित नहीं होते। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
दीपम रायचूरा ने आरोपों को बताया निराधार
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दीपम रायचूरा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका नाम मनगढ़ंत तरीके से जोड़ा जा रहा है और रिश्वत लेने के दावे झूठे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी जांच एजेंसी की ओर से नोटिस नहीं मिला है। उनके पक्ष के मुताबिक, आबकारी विभाग में पदस्थ रहने के दौरान लाइसेंसधारी के रूप में मोहित गोगिया से उनका परिचय हुआ हो सकता है। इस मामले में आरोप लगाने वाले पक्ष के दावों के साथ रायचूरा का इनकार भी महत्वपूर्ण है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले दोनों पक्षों के दावों और संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
जांच और दस्तावेजों के सत्यापन से स्पष्ट होगी स्थिति
मोहित गोगिया के खिलाफ कथित बड़े वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग की कार्रवाई का भी मीडिया रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी आरोपी के कथित बयान में किसी व्यक्ति का नाम आने मात्र से उसके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हो जाते। इस मामले में कथित भुगतान, बैंक खातों, शराब दुकानों के आवंटन, लाइसेंस और सरकारी रिकॉर्ड का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, संबंधित जांच एजेंसियों की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में क्या कार्रवाई हुई है और किन आरोपों की पुष्टि हुई है।
आबकारी विभाग की प्रक्रिया और जवाबदेही पर सवाल
भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों के ठेकों से जुड़े एक करोड़ रुपये के कथित लेन-देन ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर मोहित गोगिया के कथित बयान में गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर दीपम रायचूरा ने इन आरोपों को निराधार बताया है। फिलहाल, कथित भुगतान और ठेका आवंटन से जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किसी व्यक्ति या अधिकारी की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।








