Meerut Neela Drum Case: नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड

Myra Dubey
26 मिनट पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Ravi sinha
1 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Riya Jain
2 घंटे पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Reyansh Joshi
4 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Nisha Shah
4 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Vihaan Patel
6 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Harsh Pandya
6 घंटे पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Kunal Rao
8 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
नीला ड्रम हत्याकांड में सजा के बाद परिवार का बयान चर्चा में
मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत द्वारा मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद सौरभ के परिवार का एक और बयान चर्चा में है। सौरभ की मां रेनू देवी ने मुस्कान की छोटी बेटी को अपनाने से इनकार कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि बच्ची उनके बेटे सौरभ की नहीं, बल्कि साहिल शुक्ला की है। परिवार ने बच्ची के पितृत्व की पुष्टि के लिए DNA टेस्ट कराने से भी इनकार किया है। हालांकि, बच्ची के जैविक पितृत्व को लेकर किए गए दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
मुस्कान और साहिल को अदालत ने सुनाई मृत्युदंड की सजा
उपलब्ध विवरण के अनुसार, मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। यह मामला उस समय व्यापक चर्चा में आया था, जब सौरभ का शव नीले ड्रम में छिपाए जाने की घटना सामने आई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने विभिन्न साक्ष्य और गवाहों के बयान पेश किए। सजा सुनाए जाने के बाद पीड़ित परिवार की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
छोटी बेटी को अपनाने और DNA टेस्ट पर रेनू देवी का रुख
रेनू देवी ने कहा कि वह मुस्कान की छोटी बेटी को अपने परिवार में अपनाने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने बच्ची के पितृत्व को लेकर अपना दावा रखते हुए DNA टेस्ट कराने से भी इनकार किया। इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि परिवार का बयान या जांच से इनकार अपने आप में बच्ची के जैविक पिता की पुष्टि नहीं करता। उपलब्ध जानकारी के आधार पर बच्ची के पितृत्व को लेकर किसी प्रमाणित DNA रिपोर्ट की पुष्टि नहीं हुई है।
छोटी बेटी का जन्म जेल में हुआ था
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुस्कान की छोटी बेटी का जन्म 24 नवंबर 2025 को जेल में हुआ था। रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि इसी दिन सौरभ राजपूत का जन्मदिन था। बच्ची को अपनाने से परिवार के इनकार के बाद उसके भविष्य और देखभाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे मामलों में बच्चे के हित, सुरक्षित देखभाल और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होता है।
बड़ी पोती को लेकर परिवार ने अलग रुख जताया
रेनू देवी ने सौरभ की बड़ी बेटी को लेकर अलग रुख व्यक्त किया है। उनके मुताबिक, यदि बच्ची के नाना-नानी उसे उनके पास भेजने के लिए तैयार होते हैं, तो वह उसे अपने साथ रखने के लिए तैयार हैं। इस तरह दोनों बच्चियों को लेकर परिवार की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। उनके भविष्य से जुड़े निर्णयों में बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और हितों को प्राथमिकता देना अहम रहेगा।
मामले में 22 गवाहों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का उल्लेख
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान और कई परिस्थितिजन्य तथा डिजिटल साक्ष्य अदालत के सामने रखे। रिपोर्टों में होटल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल टावर लोकेशन जैसी जानकारियों का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि मामले में प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था और अभियोजन ने साक्ष्यों की कड़ियों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया।
फैसले के बाद परिवार ने जताया संतोष
रेनू देवी ने अदालत के फैसले पर संतोष जताते हुए पुलिस और अधिवक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। मृत्युदंड के फैसले के बाद परिवार की प्रतिक्रिया के साथ दोनों बच्चियों के भविष्य का विषय भी चर्चा में है। बच्ची के पितृत्व को लेकर लगाए गए दावे की पुष्टि के लिए प्रमाणित साक्ष्य आवश्यक होंगे। इस मामले से जुड़ी जानकारी को समझते समय अदालत के फैसले, परिवार के बयानों और अपुष्ट दावों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।







