Baba Bageshwar Statement: बाबा बागेश्वर की बेटियों को खास सलाह
Ananya Sharma
13 मिनट पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
Sonu rai
2 घंटे पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Myra Dubey
3 घंटे पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Anil Sen
4 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain!
Kavya Mishra
6 घंटे पहलेYeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बेटियों को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है। मध्य प्रदेश में मीडिया से बातचीत और धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान उन्होंने युवतियों को सोशल मीडिया रील्स के प्रभाव में आकर अनजान लोगों पर आंख मूंदकर भरोसा न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की सुंदरता देखकर उसके चरित्र, सोच या भरोसेमंद होने का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। उनके इस संदेश को सोशल मीडिया पर लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पहचान छिपाकर संपर्क करने वालों से सावधान रहने की सलाह
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बेटियों को आगाह करते हुए कहा कि इंटरनेट पर किसी से बातचीत करते समय उसकी पहचान और इरादों को समझना जरूरी है। केवल ऑनलाइन बातचीत, आकर्षक तस्वीरों या मीठी बातों के आधार पर किसी पर विश्वास नहीं करना चाहिए। उन्होंने नाम या पहचान छिपाकर संपर्क करने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की बात कही। उनका संदेश था कि युवतियां किसी भी रिश्ते या दोस्ती में आगे बढ़ने से पहले सोच-समझकर निर्णय लें और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
‘दुर्गा बनो, काली बनो’ बयान ने खींचा ध्यान
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा में आयोजित नवग्रह शक्ति पीठ प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान भी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की बेटियों को लेकर की गई टिप्पणी चर्चा में आई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने युवतियों और बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “दुर्गा बनो, काली बनो पर कभी बुर्के वाली मत बनना।” इस टिप्पणी में देवी दुर्गा और काली का उल्लेख करते हुए उन्होंने बेटियों को साहसी और मजबूत बनने का संदेश दिया। हालांकि, धार्मिक पहनावे को लेकर की गई टिप्पणी ने बयान के दूसरे पहलू पर भी चर्चा शुरू कर दी है।
युवाओं के फैसलों और भविष्य पर भी दिया जोर
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने युवावस्था में लिए जाने वाले फैसलों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस उम्र में व्यक्ति की सोच, व्यवहार और निर्णय उसके भविष्य को प्रभावित करते हैं। ऐसे में युवाओं को अपने जीवन, रिश्तों और सामाजिक संपर्कों को लेकर जागरूक रहना चाहिए। बेटियों के संदर्भ में उनका संदेश आत्मविश्वास, सतर्कता और अपनी शक्ति पहचानने से जुड़ा रहा।
महिला सशक्तिकरण के संदेश पर उठे सवाल
बेटियों को जागरूक और साहसी बनाने की अपील के साथ धार्मिक पहनावे का उल्लेख किए जाने से एक सवाल भी सामने आया है कि महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की बात करते समय व्यक्तिगत आस्था तथा पहनावे का संदर्भ किस हद तक उचित है। एक ओर अनजान लोगों से सतर्क रहने और अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक होने का संदेश महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद को लेकर भी चर्चा हो रही है। इस बयान पर लोगों की प्रतिक्रियाएं उनके सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं।
डिजिटल दौर में बेटियों की सुरक्षा क्यों जरूरी?
आज सोशल मीडिया दोस्ती, संवाद और जानकारी का बड़ा माध्यम बन चुका है, लेकिन फर्जी प्रोफाइल, पहचान छिपाने, भावनात्मक दबाव बनाने और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे जोखिम भी मौजूद हैं। ऐसे में बच्चों और युवतियों को डिजिटल सुरक्षा, निजी जानकारी की गोपनीयता और संदिग्ध संपर्कों की पहचान के बारे में जागरूक करना जरूरी है। किसी भी तरह की धमकी, ब्लैकमेलिंग या धोखाधड़ी की स्थिति में परिवार के भरोसेमंद सदस्य और संबंधित अधिकारियों की मदद लेना महत्वपूर्ण है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान के बाद महिला सुरक्षा, धार्मिक पहचान और युवाओं की डिजिटल जागरूकता जैसे मुद्दे एक बार फिर चर्चा में हैं।






