ईरान-अमेरिका तनाव से महंगा हुआ कच्चा तेल: होर्मुज़ संकट से तेल बाजार में उछाल

Anil Sen
0 सेकंड पहलेIs khabar ka asar kai deshon par padega.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों पर हमलों की घटनाओं के बाद वैश्विक तेल बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली है। निवेशकों को आशंका है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी चिंता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ब्रेंट 76 डॉलर के पार, WTI भी मजबूत
तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क WTI (West Texas Intermediate) क्रूड भी लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों की बढ़ती खरीदारी और आपूर्ति संबंधी चिंताओं ने कीमतों को ऊपर पहुंचाया है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या जहाजों पर हमला वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार इस क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है।
आपूर्ति बाधित होने का बढ़ा खतरा
विश्लेषकों के अनुसार युद्ध या सैन्य तनाव की स्थिति में तेल उत्पादक क्षेत्रों और प्रमुख समुद्री मार्गों पर आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ जाती है। यदि कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो इसका असर दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों और ईंधन की उपलब्धता पर पड़ सकता है।
बाजार में बढ़ी घबराहट, निवेशकों की आक्रामक खरीदारी
अनिश्चितता के माहौल में वैश्विक कमोडिटी बाजार में निवेशकों और व्यापारियों ने भविष्य की संभावित कमी को देखते हुए आक्रामक खरीदारी शुरू कर दी है। इस वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अधिक मजबूत हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक क्षेत्रीय तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
भारत में पेट्रोल-डीजल पर पड़ सकता है असर
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत सहित कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि घरेलू ईंधन की कीमतें सरकारी नीतियों, टैक्स और तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण पर भी निर्भर करती हैं, फिर भी लंबे समय तक महंगा क्रूड आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल सकता है।








