MP Cyber Awareness Drive: एमपी पुलिस ने अक्टूबर में चलाया साइबर जागरूकता अभियान

Kunal Rao
2 दिन पहलेCyber security ka yeh mudda bahut serious hai.
Anjali Patil
2 दिन पहलेTechnology ke is new era mein India aage hai.
Kabir Shukla
2 दिन पहलेIs research se bahut logon ko faayda hoga.
Sai Mehta
2 दिन पहलेNaye zamane ki nai technology — sab samjhein, sab apnayein.
Krishna Yadav
2 दिन पहलेYeh app/gadget sach mein game changer sabit hoga.
Kunal Rao
2 दिन पहलेYeh innovation aam logon ke bahut kaam aayega.
Anjali Patil
2 दिन पहलेYeh innovation aam logon ke bahut kaam aayega.
स्कूल-कॉलेज से गांवों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश
मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन ठगी और दूसरे साइबर अपराध आम लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। इसी को देखते हुए मध्यप्रदेश पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के तहत अक्टूबर में प्रदेशभर में अभियान चलाया। इस दौरान स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों, व्यापारियों और आम नागरिकों तक सुरक्षित डिजिटल व्यवहार का संदेश पहुंचाया गया। अभियान में साइबर ठगी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित हुईं जागरूकता गतिविधियां
मध्यप्रदेश पुलिस ने अभियान को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखा। संभाग, जोन, जिला, तहसील, अनुभाग और थाना स्तर के साथ ग्राम पंचायतों तक जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। स्कूल-कॉलेज, कोचिंग संस्थान, तकनीकी शिक्षण संस्थान, पुस्तकालय, पंचायत, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, अस्पताल, बैंक, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार, पेट्रोल पंप और शासकीय कार्यालयों को भी इससे जोड़ा गया। धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक आयोजनों के माध्यम से भी लोगों तक साइबर सुरक्षा के संदेश पहुंचाए गए।
1930 हेल्पलाइन और पोर्टल पर शिकायत की जानकारी दी
अभियान का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों को साइबर अपराध होने पर शिकायत दर्ज कराने के सही माध्यमों की जानकारी देना रहा। पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in का प्रचार किया। राज्य साइबर पुलिस की ओर से तैयार जागरूकता स्टैंडी और प्रचार सामग्री सार्वजनिक स्थानों पर लगाई गई, ताकि लोगों को शिकायत के आधिकारिक माध्यमों की जानकारी मिल सके।
पुलिस ने नागरिकों को बताया कि ऑनलाइन वित्तीय ठगी होने पर बिना देर किए 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना भी जरूरी है। शिकायत के दौरान बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, लेनदेन का विवरण, संदेश और उपलब्ध स्क्रीनशॉट जैसे प्रमाण सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। पोर्टल पर ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी सहित मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया से जुड़े कई तरह के साइबर अपराधों की शिकायत की जा सकती है।
विद्यार्थियों को फर्जी लिंक और ऑनलाइन ठगी से किया सावधान
युवाओं और विद्यार्थियों को साइबर अपराधों से बचाने के लिए स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में व्याख्यान, कार्यशालाएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। क्विज, शपथ, चित्रकला और रंगोली प्रतियोगिताओं के जरिए भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को बताया गया कि अनजान लिंक पर क्लिक करना, बिना जांचे मोबाइल ऐप डाउनलोड करना और किसी अनजान व्यक्ति के साथ गोपनीय जानकारी साझा करना जोखिम भरा हो सकता है। ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी और अन्य निजी विवरण किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई। सोशल मीडिया खातों को सुरक्षित रखने और इंटरनेट का सावधानी से इस्तेमाल करने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
सोशल मीडिया से रेडियो और सिनेमा हॉल तक प्रचार
साइबर सुरक्षा का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस और शासकीय विभागों के आधिकारिक सोशल मीडिया खातों पर फोटो, वीडियो, ऑडियो, बैनर, पर्चे और सलाह साझा की गई। स्थानीय सोशल मीडिया प्रभावशाली व्यक्तियों और प्रसिद्ध हस्तियों को भी अभियान से जोड़ा गया।
आकाशवाणी, एफएम चैनल, दूरदर्शन और स्थानीय टीवी चैनलों के माध्यम से जागरूकता संदेश, वीडियो, जिंगल और बातचीत के कार्यक्रम प्रसारित किए गए। सिनेमा हॉल और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी साइबर सुरक्षा से जुड़े पोस्टर और वीडियो दिखाए गए। अभियान के दौरान CyberDost के संदेशों के जरिए भी नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने की जानकारी दी गई।
नवरात्रि पंडालों और सार्वजनिक आयोजनों में भी पहुंचा संदेश
पुलिस ने बड़े जनसमूह तक पहुंचने के लिए नवरात्रि उत्सव और दूसरे सार्वजनिक आयोजनों का भी उपयोग किया। पूजा पंडालों में लाउडस्पीकर के माध्यम से साइबर सुरक्षा संबंधी संदेश और जिंगल सुनाए गए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में झांकियों, नाटकों और रंगोली के जरिए ऑनलाइन ठगी से बचने के उपाय बताए गए।
पुलिस अधिकारियों, सोशल मीडिया प्रभावशाली व्यक्तियों और प्रसिद्ध लोगों के वीडियो संदेश तथा रील्स भी प्रसारित किए गए। इसका उद्देश्य साइबर सुरक्षा की जानकारी को औपचारिक कार्यक्रमों से आगे बढ़ाकर आम लोगों की रोजमर्रा की बातचीत और व्यवहार का हिस्सा बनाना रहा।
रैली, दौड़ और नुक्कड़ नाटकों से किया जागरूक
अभियान के तहत साइबर जागरूकता दौड़, मैराथन और रैलियां आयोजित की गईं। व्यस्त बाजारों, हाट-बाजारों, शॉपिंग मॉल और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर स्टैंडी, पोस्टर और पर्चे लगाए गए। नुक्कड़ नाटकों और जनसंवाद के माध्यम से लोगों को साइबर अपराधों के सामान्य तरीकों और उनसे बचने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई।
बैंकों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंड जैसे स्थानों को भी अभियान से जोड़ा गया। इन जगहों पर अलग-अलग आयु वर्ग और पृष्ठभूमि के लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में यहां जागरूकता सामग्री लगाने और सीधे संवाद करने से अधिक नागरिकों तक संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया।
साइबर चौपाल और मुनादी से गांवों तक पहुंची पुलिस
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता के लिए ग्राम पंचायतों, आंगनवाड़ियों, स्वास्थ्य केंद्रों, राशन वितरण केंद्रों, कृषि उपज मंडियों, हाट-बाजारों और धार्मिक स्थलों पर कार्यक्रम किए गए। ग्राम सभाओं और साइबर चौपाल के माध्यम से पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और ऑनलाइन धोखाधड़ी के तरीकों की जानकारी दी।
इस काम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय कर्मचारियों की मदद भी ली गई। गांवों में कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराकर नागरिकों को 1930 हेल्पलाइन और cybercrime.gov.in के बारे में बताया गया। इससे उन लोगों तक भी जानकारी पहुंचाने का प्रयास हुआ, जो सोशल मीडिया या डिजिटल माध्यमों का नियमित इस्तेमाल नहीं करते।
पहले भी चलाए जा चुके हैं सेफ क्लिक अभियान
मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर जागरूकता पहल पहले भी अलग-अलग चरणों में सामने आ चुकी है। फरवरी 2025 में प्रदेश के सभी जिलों में ‘सेफ क्लिक’ अभियान चलाया गया था। इसके तहत स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दी गई थी। दतिया पुलिस सहित अलग-अलग जिलों में जागरूकता कार्यक्रम, पर्चा वितरण और 1930 हेल्पलाइन के प्रचार की गतिविधियां हुई थीं।
इसके बाद 2026 में ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान भी चलाया गया। जुलाई 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 15 दिन के इस अभियान में भोपाल पुलिस कमिश्नरेट प्रदेश में पहले स्थान पर रहा था। भोपाल में स्कूल-कॉलेज, कोचिंग संस्थानों, बैंक, होटल, अस्पताल, न्यायालय और आवासीय क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। अक्टूबर का अभियान इसी तरह की गतिविधियों को प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की पहल के रूप में देखा जा सकता है।
देश में 32.80 लाख से अधिक शिकायतों पर बचाई गई रकम
साइबर अपराधों की चुनौती का अंदाजा राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 22 जुलाई 2026 को जारी जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के तहत संचालित व्यवस्था में 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों के आधार पर 11,158 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय राशि बचाई गई थी। यह आंकड़ा देशभर का है, मध्यप्रदेश का अलग आंकड़ा नहीं है।
मंत्रालय के अनुसार, वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल सूचना देने और ठगी की रकम को आगे स्थानांतरित होने से रोकने के लिए 1930 हेल्पलाइन और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की व्यवस्था की गई है। ऐसे में पुलिस का जागरूकता अभियान नागरिकों को इन सुविधाओं की जानकारी देने और समय पर शिकायत करने के लिए प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
डिजिटल सुरक्षा के लिए सतर्कता और समय पर शिकायत जरूरी
मध्यप्रदेश पुलिस के अक्टूबर अभियान में स्कूलों से लेकर गांवों तक अलग-अलग माध्यमों से लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। इसका उद्देश्य नागरिकों को डिजिटल सुविधाओं का सुरक्षित और जिम्मेदारी से उपयोग करने के लिए प्रेरित करना रहा।
ऑनलाइन ठगी की स्थिति में समय पर शिकायत करना, संदिग्ध संदेशों और लिंक से बचना तथा अपनी गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखना साइबर अपराधों से बचाव के अहम उपाय हैं। यह अभियान बताता है कि डिजिटल सुरक्षा केवल तकनीकी व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि इसमें आम नागरिकों की जागरूकता और भागीदारी भी जरूरी है।








