Mumbai Lawyer Arrested: 28 हजार करोड़ के साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क में वकील गिरफ्तार

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28 हजार करोड़ रुपये के साइबर नेटवर्क की जांच में गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित तौर पर 28,000 करोड़ रुपये के बैंकिंग लेन-देन से जुड़े देशव्यापी साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में एक वकील को गिरफ्तार किया है। यह इस मामले में एजेंसी की सातवीं गिरफ्तारी बताई गई है। ईडी के अधिकारियों ने राशेश उपाध्याय उर्फ राशेश शाह को मुंबई एयरपोर्ट पर उस समय हिरासत में लिया, जब वह दिल्ली जाने वाली उड़ान में सवार होने वाले थे। इस कार्रवाई में सीमा शुल्क विभाग और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने भी मदद की।
गोवा की महिला से 2.60 करोड़ रुपये की ठगी का मामला
ईडी की जांच गोवा पुलिस द्वारा दर्ज उस मामले से जुड़ी है, जिसमें एक महिला ने आरोप लगाया था कि 21 मई से 2 जून 2025 के बीच साइबर धोखेबाजों ने उसे तथाकथित डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर कई बैंक खातों में 2.60 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। ईडी ने आरोपी को पणजी ले जाकर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत में पेश किया। अदालत ने उसे 29 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
अधिकारियों को रिश्वत देने और खातों को खुलवाने का आरोप
ईडी ने अदालत में दावा किया कि उपाध्याय कथित नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रहा था। एजेंसी के आरोप के मुताबिक, पुलिस शिकायतों के बाद जब नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों पर रोक लगाई गई, तो आरोपी ने कथित तौर पर अंगड़िया नेटवर्क के जरिए संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों को नकद रिश्वत देने की व्यवस्था की, ताकि खाते दोबारा खुलवाए जा सकें। ईडी का यह भी कहना है कि आरोपी ने वकील के रूप में पंजीकरण कराया था, लेकिन संबंधित आरोपियों या कंपनियों की ओर से अदालत में पेश होने अथवा वकालतनामा दाखिल करने का रिकॉर्ड नहीं मिला। ये आरोप जांच का हिस्सा हैं और अदालत में इनकी पुष्टि होना बाकी है।
400 खातों के जरिए रकम भेजने का दावा
ईडी के अनुसार, गोवा की पीड़िता से कथित तौर पर हासिल की गई रकम लगभग 400 संदिग्ध बैंक खातों के जरिए आगे भेजी गई। ये खाते कथित रूप से डमी निदेशकों के माध्यम से संचालित वस्तु, यात्रा और विदेशी मुद्रा कारोबार से जुड़ी कंपनियों से संबंधित थे। एजेंसी का दावा है कि रकम बाद में नकद निकाली गई और भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजर के जरिए विदेशी मुद्रा में बदली गई। ईडी ने बताया कि नेटवर्क से जुड़े खातों का पता 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 300 से अधिक पीड़ितों की शिकायतों और 160 से अधिक प्राथमिकी में चला है। इन मामलों में 400 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की बात सामने आई है, जबकि कथित नेटवर्क के कुल बैंकिंग लेन-देन करीब 28,000 करोड़ रुपये और नकद जमा लगभग 2,900 करोड़ रुपये बताए गए हैं। एजेंसी अब कथित रिश्वतखोरी में शामिल अधिकारियों, अंगड़िया नेटवर्क और अन्य मध्यस्थों की भूमिका तथा अपराध से अर्जित पूरी रकम का पता लगाने में जुटी है।








