Russia US Diesel Deal: रूस से अमेरिका पहुंचेगी डीजल की खेप, 2023 के बाद पहली सप्लाई

रूस से अमेरिका पहुंचेगी डीजल की खेप, 2023 के बाद पहली सप्लाई
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Harsh Pandya

Harsh Pandya

0 सेकंड पहले

Duniya mein kuch bada hone wala hai, taiyar rehna hoga.

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रूस से अमेरिका के लिए रवाना हुए डीजल के तीन टैंकर
रूस से अमेरिका के लिए डीजल की खेप रवाना होने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हलचल बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के प्रिमोर्स्क बंदरगाह से तीन टैंकर करीब 40 हजार टन डीजल लेकर रवाना हुए हैं। रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने इस सप्लाई की जानकारी दी। बताया गया है कि 2023 के बाद यह पहली बार है, जब रूस से डीजल की खेप अमेरिका भेजी जा रही है। यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच फोन पर हुई बातचीत के लगभग दो सप्ताह बाद सामने आया है।

 

ईंधन की कीमतें कम करने पर अमेरिका का जोर
रिपोर्ट के अनुसार, रूस के प्रत्यक्ष निवेश कोष ने इस सप्लाई में मदद की है। समुद्री जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर के हवाले से बताया गया कि एक टैंकर ने न्यूयॉर्क जाने का संकेत दिया था और उसके 7 नवंबर तक पहुंचने का अनुमान था। अमेरिका में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करना इस घटनाक्रम की एक संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, तीन टैंकरों में मौजूद 40 हजार टन डीजल अमेरिकी मांग की तुलना में सीमित मात्रा है। रिपोर्ट में अक्टूबर और नवंबर के दौरान इससे कहीं अधिक डीजल भेजने की संभावनाओं का भी जिक्र किया गया है, लेकिन इन योजनाओं की वास्तविक स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

 

रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर राजनीतिक विवाद
रूस से डीजल की सप्लाई को लेकर यूक्रेन में आलोचना होने की बात भी सामने आई है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस फैसले पर सवाल उठाए, जबकि अमेरिका में भी कुछ नेताओं ने रूस के साथ ऊर्जा कारोबार को लेकर आपत्ति जताई। विवाद की एक वजह रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावित कार्रवाई भी है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों के मामले में फिलहाल कार्रवाई रोकने का फैसला किया। इस मुद्दे का असर अमेरिका-रूस संबंधों के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध से जुड़ी कूटनीतिक चर्चाओं पर भी पड़ सकता है।

 

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर क्या होगा असर
रूस से अमेरिका के लिए डीजल की यह खेप ऊर्जा व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बदलते समीकरणों को दर्शाती है। रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, तीन टैंकरों में करीब 40 हजार टन डीजल है, जो लगभग तीन लाख बैरल के बराबर बताया गया है। अमेरिका की रोजाना डीजल खपत के मुकाबले यह मात्रा सीमित है, इसलिए केवल इस खेप के आधार पर ईंधन की कीमतों में बड़ी गिरावट का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। आगे सप्लाई जारी रहती है या नहीं, यह प्रतिबंधों, व्यापारिक फैसलों और दोनों देशों की नीतियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस घटनाक्रम को ऊर्जा बाजार और वैश्विक राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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Duniya mein kuch bada hone wala hai, taiyar rehna hoga.

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