Women Prisoners Observe Ahoi Ashtami: मेरठ जेल में अहोई अष्टमी का व्रत रखेंगी तीन महिला बंदी

मेरठ जेल में अहोई अष्टमी का व्रत रखेंगी तीन महिला बंदी
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मेरठ जेल में अहोई अष्टमी का व्रत रखेंगी तीन महिला बंदी
उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंद तीन महिला बंदियों मुस्कान रस्तोगी, रविता और दामिनी ने अपने बच्चों की लंबी उम्र की कामना के लिए 1 नवंबर को अहोई अष्टमी का व्रत रखने की इच्छा जताई है। तीनों ने जेल प्रशासन से व्रत के लिए पूजा सामग्री उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

 

पूजा सामग्री के लिए जेल प्रशासन से किया अनुरोध
जानकारी के अनुसार, तीनों महिला बंदियों ने जेल अधीक्षक से धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति और आवश्यक सामग्री की मांग की है। जेल में सामाजिक और धार्मिक कार्यों से जुड़ी संस्थाओं की मदद से पूजा सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। हाल ही में एक महिला संस्था की ओर से बंदियों को करवाचौथ के लिए मिट्टी के करवे और शृंगार सामग्री भी वितरित की गई थी।

 

बेटियों और बच्चों के लिए व्रत रखने की इच्छा
मुस्कान रस्तोगी की दो बेटियां हैं, जबकि रविता और दामिनी भी अपने बच्चों के लिए व्रत रखना चाहती हैं। तीनों ने संतान की लंबी उम्र की कामना के लिए अहोई अष्टमी की पूजा करने की इच्छा जताई है। अहोई अष्टमी पर माताएं परंपरागत रूप से अपनी संतानों की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।

 

मुस्कान की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील
मुस्कान रस्तोगी मेरठ के चर्चित नीले ड्रम मामले में अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराई गई है और उसे मृत्युदंड सुनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उसने इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है। अपील पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार फैसला होगा।

 

रविता और दामिनी के मामले भी चर्चा में
रविता को अपने पति अमित कश्यप की हत्या के मामले में मृत्युदंड सुनाए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं, दामिनी अपने पति अतुल पंवार की हत्या के आरोप में जेल में बंद है। इन मामलों में न्यायिक स्थिति और अपील से जुड़ी जानकारी के लिए संबंधित अदालतों के आधिकारिक रिकॉर्ड देखना महत्वपूर्ण है।

 

जेल में धार्मिक गतिविधियों के लिए नियम
जेल प्रशासन के अनुसार, बंदियों को जेल नियमावली के दायरे में अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार व्रत और पूजा-पाठ करने की अनुमति दी जाती है। आवश्यकतानुसार फलाहार और पूजन सामग्री की व्यवस्था भी की जा सकती है। मुलाकात और अन्य सुविधाएं जेल के निर्धारित नियमों के अनुसार उपलब्ध कराई जाती हैं।

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