बीजिंग में 25वें दौर की वार्ता: LAC पर बड़ी बैठक डोभाल-वांग यी की वार्ता

Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वें दौर की वार्ता 25 अगस्त 2026 को बीजिंग में आयोजित की गई। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी ने इस उच्च स्तरीय वार्ता की सह-अध्यक्षता की। बैठक का मुख्य उद्देश्य वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा सीमा विवाद के समाधान की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाना रहा। दोनों पक्षों के बीच यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने और सीमा पर भरोसा बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं।
सीमा पर शांति और स्थिरता पर जोर
वार्ता में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने को प्रमुख प्राथमिकता दी गई। भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि सीमा पर शांति और सौहार्द दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए जरूरी है। वर्ष 2020 के सीमा तनाव के बाद दोनों देशों ने सैन्य और कूटनीतिक माध्यमों से तनाव कम करने तथा सीमा पर स्थिति को स्थिर करने के लिए कई दौर की बातचीत की है। विशेष प्रतिनिधि तंत्र को इसी व्यापक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
डोभाल की चीनी नेतृत्व से मुलाकात
मुख्य वार्ता से पहले अजीत डोभाल की चीन के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ मुलाकात भी चर्चा में रही। दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने के साथ सीमा क्षेत्रों में शांति कायम रखने पर जोर दिया गया। भारत और चीन के बीच पहले भी विशेष प्रतिनिधि स्तर पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है और इस तंत्र का उद्देश्य सीमा प्रश्न के समाधान के लिए राजनीतिक स्तर पर संवाद बनाए रखना है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत में सीमा विवाद के साथ व्यापक द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होता रहा है।
LAC और सैनिक तनाव कम करना अहम मुद्दा
बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति, सीमा प्रबंधन और भविष्य में किसी भी तरह के तनाव को रोकने के उपायों पर चर्चा महत्वपूर्ण रही। वर्ष 2020 के बाद पूर्वी लद्दाख सहित कई क्षेत्रों में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव पैदा हुआ था, जिसके बाद सैन्य कमांडर स्तर और कूटनीतिक स्तर पर लगातार बातचीत होती रही। भारत का रुख रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना दोनों देशों के संबंधों में स्थायी प्रगति संभव नहीं है। ऐसे में विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता को सीमा प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कूटनीतिक माध्यम माना जाता है।
द्विपक्षीय संबंध सामान्य करने की कोशिश
सीमा विवाद के अलावा भारत और चीन के बीच व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, संपर्क, लोगों के बीच आदान-प्रदान और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग जैसे विषयों पर भी संवाद जारी है। भारत का कहना है कि सीमा से जुड़े मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए और इन्हें दोनों देशों के व्यापक संबंधों में बाधा नहीं बनने देना चाहिए। आने वाले समय में सीमा पर स्थिरता दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
आगे की बातचीत पर टिकी नजर
बीजिंग में हुई 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता के बाद अब दोनों देशों के बीच आगे होने वाली कूटनीतिक और सैन्य बातचीत पर नजर रहेगी। सीमा विवाद का अंतिम समाधान अभी भी एक लंबी प्रक्रिया है और दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण मतभेद बने हुए हैं। इसके बावजूद उच्च स्तरीय संवाद जारी रहना तनाव कम करने और आपसी समझ बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत का लगातार जोर शांतिपूर्ण बातचीत, सीमा पर शांति और स्थिरता तथा सीमा प्रश्न के उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर रहा है।








