एमपी में UCC को कैबिनेट की मंजूरी: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी पूरी

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी पूरी
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Tanya Bajaj

Tanya Bajaj

12 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

13 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Diya Gupta

Diya Gupta

15 घंटे पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Anika Rajput

Anika Rajput

15 घंटे पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Sonu rai

Sonu rai

16 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Payal jadon

Payal jadon

18 घंटे पहले

Desh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.

Pihu Agarwal

Pihu Agarwal

18 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Pihu Agarwal

Pihu Agarwal

18 घंटे पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Taushif Shekh

Taushif Shekh

19 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल के पास ऐतिहासिक जगदीशपुर में आयोजित विशेष कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026 के मसौदे को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। सरकार इसे सामाजिक सुधार और समान नागरिक अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। अब यह विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा।


मानसून सत्र में पेश होगा विधेयक
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद UCC विधेयक को 20 जुलाई 2026 से शुरू हो रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में चर्चा और पारित कराने के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यदि विधेयक पारित होता है तो उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन जाएगा।


जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई समिति की रिपोर्ट बनी आधार
यह मसौदा सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर आधारित है। समिति ने पूरे प्रदेश में जनसंवाद कर ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से करीब 9.5 लाख सुझाव प्राप्त किए। इन सुझावों के विश्लेषण के बाद अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया गया।

 

विवाह, तलाक और संपत्ति के लिए समान नियम
ड्राफ्ट में सभी समुदायों के लिए बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध, विवाह पंजीकरण अनिवार्य, पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम विवाह आयु निर्धारित की गई है। साथ ही तलाक, भरण-पोषण, गोद लेने और उत्तराधिकार के मामलों में महिलाओं और पुरुषों को समान कानूनी अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को अवैध और दंडनीय बनाने तथा लिव-इन रिलेशनशिप का एक माह के भीतर पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव भी शामिल है।


आदिवासी समुदाय को कानून से मिलेगी छूट
सरकार ने प्रदेश के अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखने का निर्णय लिया है। समिति की सिफारिशों के अनुरूप आदिवासी समाज की पारंपरिक, सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथाएं पहले की तरह लागू रहेंगी। सरकार का कहना है कि इससे जनजातीय पहचान और परंपराओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।


सामाजिक सुधार और समान अधिकार पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह कानून सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और समान नागरिक अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का दावा है कि UCC से राज्य में विवाह, परिवार और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में एकरूपता आएगी तथा महिलाओं को अधिक कानूनी सुरक्षा और समान अधिकार मिलेंगे। अब इस विधेयक पर विधानसभा में विस्तृत चर्चा होने के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।

 

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Tanya Bajaj

Tanya Bajaj

12 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Ritika Ghosh

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13 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Diya Gupta

Diya Gupta

15 घंटे पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Anika Rajput

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15 घंटे पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Sonu rai

Sonu rai

16 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Payal jadon

Payal jadon

18 घंटे पहले

Desh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.

Pihu Agarwal

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18 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Pihu Agarwal

Pihu Agarwal

18 घंटे पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Taushif Shekh

Taushif Shekh

19 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

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