water tank collapses: बरेली में नदी के कटान में करोड़ों की टंकी जमींदोज
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Sai Mehta
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
बरेली के बैरमनगर क्षेत्र में किच्छा नदी के तेज कटान की चपेट में जल जीवन मिशन के तहत निर्माणाधीन पानी की टंकी आ गई। करीब 3.97 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा यह ओवरहेड टैंक अचानक नदी की ओर खिसकने लगा और देखते ही देखते नदी में समा गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह निर्माण नदी के तेज बहाव और कटान के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। घटना ने इलाके में जल परियोजना की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
3.97 करोड़ की परियोजना को बड़ा नुकसान
बताया जा रहा है कि निर्माणाधीन पानी की टंकी की लागत करीब 3.97 करोड़ रुपये थी। यह परियोजना जल जीवन मिशन के तहत क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार की जा रही थी। निर्माण पूरा होने से पहले ही टंकी नदी के कटान की चपेट में आ गई। इसके नदी में समाने से परियोजना को बड़ा नुकसान हुआ है। घटना के बाद संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की निगाह मामले पर है। अब परियोजना को दोबारा तैयार करने और नुकसान का आकलन भी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
तेज कटान बना टंकी गिरने की वजह
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किच्छा नदी के तेज कटान ने टंकी के आसपास की जमीन को प्रभावित किया। जमीन का कटाव बढ़ने के बाद निर्माणाधीन ढांचा नदी की तरफ खिसक गया और अंततः नदी में गिर गया। हालांकि केवल नदी के कटान को अंतिम कारण मानना अभी जल्दबाजी होगी। निर्माण स्थल की स्थिति, नींव, तकनीकी डिजाइन और सुरक्षा उपायों की भी जांच की जा सकती है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना के पीछे सिर्फ प्राकृतिक कटान था या कोई अन्य तकनीकी कारण भी जिम्मेदार था।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
करोड़ों रुपये की लागत वाली परियोजना के नदी में समा जाने के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा शुरू हो गई है कि निर्माण स्थल का चयन और नदी के कटान को लेकर पहले से पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे या नहीं। हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी तरह की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की भूमिका भी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासनिक स्तर पर मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
जल जीवन मिशन को लगा झटका
यह पानी की टंकी जल जीवन मिशन के तहत तैयार की जा रही थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर पेयजल की सुविधा पहुंचाना है। निर्माणाधीन टंकी के नदी में समाने से संबंधित परियोजना की प्रगति प्रभावित होने की संभावना है। क्षेत्र में इस परियोजना के पूरा होने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए भी यह घटना चिंता का विषय है। अब विभाग को नुकसान का आकलन करने के साथ आगे की कार्ययोजना पर भी निर्णय लेना होगा। परियोजना को किस तरह और कब दोबारा आगे बढ़ाया जाएगा, यह जांच और विभागीय निर्णय के बाद स्पष्ट होगा।
प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश
घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में निर्माण स्थल की स्थिति, नदी के कटान, नींव और निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता समेत विभिन्न पहलुओं को देखा जा सकता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही टंकी के नदी में समाने के वास्तविक कारणों की स्थिति स्पष्ट होगी। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या तकनीकी खामी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई का रास्ता भी साफ हो सकता है। फिलहाल मामले में जांच पूरी होने का इंतजार किया जा रहा है।



