Shiva temple collapses: गंगा में समा गया सदियों पुराना शिव मंदिर
Nidhi kumari
9 घंटे पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Ravi sinha
10 घंटे पहलेYeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.
Aarohi Chaudhary
11 घंटे पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
Ishaan Tiwari
12 घंटे पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
Kunal Rao
13 घंटे पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
Anil Sen
15 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain!
Neel Saxena
15 घंटे पहलेSamaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के रतुआ इलाके से गंगा के बढ़ते जलस्तर और भीषण तट कटाव की डराने वाली तस्वीर सामने आई है। रतुआ-I ब्लॉक के मुनिरामटोला क्षेत्र में करीब 150 से 175 साल पुराना शिव मंदिर तेज नदी प्रवाह और लगातार हो रहे कटाव की चपेट में आकर गंगा में समा गया। मंदिर के नदी में गिरने के दृश्य सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है और क्षेत्र में लगातार बढ़ते कटाव को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती और गंभीर हो गई है।
तेज बहाव के साथ कटाव ने बढ़ाई चिंता
मालदा में इस समय गंगा का जलस्तर बढ़ने और नदी के किनारों पर तेज कटाव की स्थिति बनी हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक भारी बारिश और बिहार की ओर से आने वाले पानी के कारण गंगा का प्रवाह बढ़ा है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है। इसी बिगड़ती स्थिति के बीच रतुआ का ऐतिहासिक मंदिर नदी के कटाव की चपेट में आ गया। विशेषज्ञों ने भी आने वाले दिनों में जलस्तर और बढ़ने की आशंका जताई थी।
मंदिर के नदी में समाने का वीडियो वायरल
शिव मंदिर के गंगा में समाने के बाद इसके वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से सामने आईं। वायरल दृश्यों में मंदिर का ढांचा नदी के तेज बहाव और कटते हुए किनारे के बीच दिखाई देता है और फिर पानी में समाता नजर आता है। स्थानीय लोगों के लिए यह घटना सिर्फ एक धार्मिक स्थल के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि मालदा के उन इलाकों में लगातार बढ़ रही नदी कटाव की समस्या की गंभीरता को भी सामने लाती है।
12 लाख क्यूसेक के आंकड़े को लेकर सावधानी
फरक्का बैराज से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों में 31 अगस्त को करीब 12 लाख क्यूसेक जलप्रवाह दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी, जबकि बाद में यह करीब 11.9 लाख क्यूसेक रहा। हालांकि इसे सीधे मंदिर के ढहने का कारण बताना उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टें मंदिर के समाने की घटना को मुख्य रूप से गंगा के तेज प्रवाह और गंभीर नदी तट कटाव से जोड़ती हैं। फरक्का बैराज के महाप्रबंधक ने भी बैराज की क्षमता और मौजूदा जलप्रवाह को लेकर स्थिति को नियंत्रण में बताया था।
मालदा के साथ मुर्शिदाबाद में भी बाढ़ का दबाव
गंगा के बढ़ते जलस्तर और कटाव का असर मालदा के अलावा आसपास के क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है। मालदा में गंगा के खतरे के निशान से ऊपर जाने के बाद करीब 2.5 लाख लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई है। निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचने से प्रशासन को राहत और बचाव अभियान तेज करना पड़ा है। वहीं पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद क्षेत्र में भी भारी बारिश और मिट्टी के कटाव से बुनियादी ढांचे पर असर पड़ा है।
हर साल सामने आती है नदी कटाव की चुनौती
मालदा और मुर्शिदाबाद के गंगा तटवर्ती इलाकों में नदी कटाव लंबे समय से गंभीर समस्या रहा है। मौजूदा घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि बढ़ते जलस्तर के साथ कमजोर नदी तटों पर रहने वाले गांवों और ऐतिहासिक संरचनाओं के लिए खतरा कितना बढ़ सकता है। ऐतिहासिक शिव मंदिर का गंगा में समाना स्थानीय विरासत के नुकसान के साथ-साथ नदी कटाव से प्रभावित इलाकों की संवेदनशीलता का बड़ा संकेत है। अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की राहत, तट संरक्षण और आगे होने वाले कटाव को रोकने की कार्रवाई पर है।



