308 Wheel Mahabali: यूपी में दौड़ रहा 308 पहियों वाला महाबली ट्रक

Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेItne saalon baad bhi sach kyon nahi aaya saamne?
Kavya Mishra
0 सेकंड पहलेYeh case bahut gehri saazish lagti hai.
Simran Arora
0 सेकंड पहलेAur gehri jaanch honi chahiye is poore matter mein.
Diya Gupta
37 मिनट पहलेIs rahasya ki tah mein kya chhupa hai, sochne par majboor kar diya.
Ananya Sharma
1 घंटे पहलेAur gehri jaanch honi chahiye is poore matter mein.
Sneha Menon
2 घंटे पहलेYeh kahani kisi thriller movie se bilkul kam nahi.
Priya Iyer
3 घंटे पहलेIs mystery ka ant kab hoga? Public jaanna chahti hai.
यूपी में दौड़ रहा 308 पहियों वाला महाबली
उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों 308 पहियों वाला विशाल ट्रक लोगों का ध्यान खींच रहा है। यह महाबली ट्रक बेल्जियम से आई करीब 164 टन वजनी मशीन को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से लखीमपुर खीरी के कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल के लिए ले जा रहा है। करीब 41 मीटर लंबी इस मशीन को सड़क मार्ग से पहुंचाने के लिए विशेष मल्टी-एक्सल हाइड्रोलिक ट्रेलर का इस्तेमाल किया गया है।
बेल्जियम से शुरू हुई यात्रा
मशीन की यात्रा बेल्जियम से शुरू हुई और समुद्री रास्ते से भारत पहुंचने के बाद इसे पारादीप बंदरगाह से सड़क मार्ग पर लाया गया। वहां से यह झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंची। चंदौली पहुंचने के बाद ट्रक को रास्ते की चौड़ाई, ऊंचाई और अन्य बाधाओं के कारण कई जगह रुकना पड़ा।
इतने पहियों की जरूरत क्यों पड़ी
मशीन का वजन सामान्य भारी वाहनों की क्षमता से कहीं अधिक है। इसलिए इसे कई मॉड्यूलर हाइड्रोलिक ट्रेलरों को जोड़कर तैयार किए गए विशेष परिवहन तंत्र पर रखा गया है। बड़ी संख्या में एक्सल और पहियों की मदद से मशीन का भार अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाता है, जिससे इतने भारी उपकरण को सड़क पर नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
रफ्तार बेहद धीमी
इस महाबली ट्रक की गति सामान्य ट्रकों की तुलना में काफी कम है। रिपोर्टों के अनुसार यह कई जगहों पर रोजाना करीब 10 से 20 किलोमीटर ही आगे बढ़ पा रहा है। चंदौली में रास्ते की परिस्थितियों के कारण इसे कई दिनों तक रुकना पड़ा और रास्ता तैयार करने के बाद आगे बढ़ाया गया।
रास्ते में हटानी पड़ रही बाधाएं
इतने बड़े परिवहन तंत्र को निकालने के लिए सड़क, पुल, डिवाइडर, बिजली की लाइन और अन्य ढांचों की पहले से जांच करनी पड़ती है। कुछ जगहों पर रास्ता चौड़ा करने और बाधाओं को हटाने की जरूरत पड़ी। वाराणसी क्षेत्र में कुछ फुट ओवरब्रिज को हटाने या उनमें बदलाव करने की तैयारियों की भी रिपोर्ट सामने आई थी।
क्यों खास है यह परिवहन
इस पूरे अभियान की खासियत केवल 308 पहिए नहीं हैं, बल्कि इतने भारी और बड़े औद्योगिक उपकरण को कई राज्यों से होते हुए सड़क मार्ग से सुरक्षित पहुंचाना है। इसके लिए विशेष ट्रेलर, भारी वाहनों की टीम और रास्ते की लगातार निगरानी जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत पड़ती है।
लखीमपुर खीरी है मंजिल
यह विशाल मशीन उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के कुंभी में विकसित किए जा रहे बायोपॉलीमर प्लांट के लिए ले जाई जा रही है। सितंबर के अंत तक यह चंदौली से आगे बढ़कर वाराणसी की ओर पहुंच चुकी थी, जबकि अंतिम मंजिल तक पहुंचने में अभी समय लगना बताया गया था।






