Rajasthan Folk Song, Jahaj Bai, Rajasthani Culture: राजस्थान का लोकगीत ‘जहाज बाई’ वायरल, जानिए ऊंट और पीहर की याद से जुड़ी कहानी

राजस्थान का लोकगीत ‘जहाज बाई’ वायरल, जानिए ऊंट और पीहर की याद से जुड़ी कहानी
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Taushif Shekh

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नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों राजस्थान के पारंपरिक लोकगीतों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। पीढ़ियों से लोकजीवन का हिस्सा रहे ये गीत अब नए संगीत और फ्यूजन के जरिए लोगों तक पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में मारवाड़ का लोकप्रिय लोकगीत ‘जहाज बाई’ भी चर्चा में है। पहली बार सुनने पर भले ही इसके नाम से किसी महिला या पानी में चलने वाले जहाज का ख्याल आए, लेकिन इस लोकगीत का संबंध राजस्थान के रेगिस्तान में जीवन का अहम हिस्सा रहे ऊंट से है।

 

‘जहाज बाई’ का क्या है असली मतलब?

 

राजस्थान की मारवाड़ी लोक परंपरा में ‘जहाज बाई’ गीत शादी-ब्याह जैसे अवसरों पर गाया जाता रहा है। यहां जहाज का संबंध पानी में चलने वाले जहाज से नहीं, बल्कि ऊंट से जोड़ा जाता है। ऊंट को ‘रेगिस्तान का जहाज’ कहा जाता है, क्योंकि पुराने समय में रेतीले इलाकों में लंबी दूरी तय करने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण साधनों में से एक था।

 

जब राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में पक्की सड़कें और आधुनिक परिवहन की सुविधाएं नहीं थीं, तब ऊंट लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाता था। इसी वजह से ऊंट स्थानीय जीवन, संस्कृति और लोकगीतों में खास स्थान रखता है।

 

पीहर जाने की आस को बयां करता है गीत

 

‘जहाज बाई’ लोकगीत को नवविवाहित महिलाओं की भावनाओं से भी जोड़कर देखा जाता है। शादी के बाद अपने मायके यानी पीहर से दूर रहने वाली दुल्हन को जब अपने परिवार की याद आती थी, तो लोकगीतों के जरिए वह अपनी भावनाएं व्यक्त करती थी।

 

गीत के बोलों में रेगिस्तान की धरती पर ऊंट को देखने की उत्सुकता दिखाई देती है। ऊंट उस दौर में यात्रा का प्रमुख साधन था और महिलाओं के पीहर आने-जाने से भी जुड़ा हुआ था। ऐसे में ऊंट को देखना उनके लिए केवल एक पशु को निहारना नहीं, बल्कि अपने मायके से जुड़ी उम्मीद और खुशी का प्रतीक भी हो सकता था।

 

पानी की किल्लत से भी जुड़ी लोकमान्यता

 

इस लोकगीत की व्याख्या राजस्थान के रेगिस्तानी जीवन और पानी की कमी से भी जोड़कर की जाती है। पारंपरिक रूप से कई रेगिस्तानी इलाकों में लोगों को पीने योग्य पानी के लिए दूर तक जाना पड़ता था। ऐसे में पनिहारियों और पानी लाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ऊंटों का दैनिक जीवन में विशेष महत्व था।

 

मीठे पानी की उपलब्धता परिवारों के लिए राहत और खुशी का कारण होती थी। हालांकि, ‘जहाज बाई’ गीत की उत्पत्ति को पानी की किल्लत से जोड़ने वाली व्याख्या को लोकमान्यता के रूप में देखना चाहिए, क्योंकि इसकी ऐतिहासिक उत्पत्ति की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

 

राजस्थान की संस्कृति में ऊंट का खास स्थान

 

राजस्थान में ऊंट केवल आवागमन का साधन नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका और सामाजिक जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। खेती-किसानी से लेकर सामान ढोने और लंबी यात्राओं तक, इस पशु ने रेगिस्तानी जीवन को आसान बनाने में योगदान दिया है।

 

यही कारण है कि ऊंट राजस्थान की लोककथाओं, गीतों और परंपराओं में बार-बार दिखाई देता है। ‘जहाज बाई’ जैसे लोकगीतों में मायके की याद, परिवार से जुड़ाव, यात्रा की उम्मीद और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों से मिलने वाली खुशी के भाव एक साथ नजर आते हैं।

 

लोकगीतों में जिंदा है राजस्थान का इतिहास

 

‘जहाज बाई’ की लोकप्रियता यह दिखाती है कि लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि किसी समाज के रहन-सहन, भावनाओं और इतिहास को भी अपने भीतर समेटे रहते हैं। आधुनिक दौर में सोशल मीडिया के जरिए ऐसे गीत नई पीढ़ी तक पहुंच रहे हैं और राजस्थान की समृद्ध लोकसंस्कृति को फिर से पहचान दिला रहे हैं।

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