Netanyahu Eyes Comeback: इजरायल की सत्ता में फिर लौट सकते हैं नेतन्याहू

इजरायल की सत्ता में फिर लौट सकते हैं नेतन्याहू
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Ravi sinha

Ravi sinha

0 सेकंड पहले

Duniya mein kuch bada hone wala hai, taiyar rehna hoga.

Kavya Mishra

Kavya Mishra

0 सेकंड पहले

Poori duniya is khabar par nazar rakh rahi hai.

Ravi sinha

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0 सेकंड पहले

World leaders kya kadam uthayenge? Sabki nazar hai.

Nisha Shah

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0 सेकंड पहले

Aise haalaaton mein diplomatic relations bahut important hote hain.

Taushif Shekh

Taushif Shekh

36 मिनट पहले

Yeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.

Pooja Reddy

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2 घंटे पहले

Yeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.

Pooja Reddy

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3 घंटे पहले

Poori duniya is khabar par nazar rakh rahi hai.

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इजरायल में सरकार गठन को लेकर सियासी हलचल
इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट को राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने अगली सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। 27 अक्टूबर को हुए चुनावों में किसी भी पार्टी या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। ऐसे में आइजनकोट के सामने सहयोगी दलों का समर्थन जुटाने की बड़ी चुनौती है।

 

बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत
इजरायल की 120 सदस्यीय संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। आइजनकोट की यशार पार्टी और उसके सहयोगी दलों के पास फिलहाल कुल 48 सीटें हैं। इनमें मध्य-दक्षिणपंथी टुगेदर पार्टी, द डेमोक्रेट्स और एविग्डोर लीबरमैन की इजरायल अवर होम पार्टी शामिल हैं। बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उन्हें अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है।

 

अरब दलों के समर्थन से बन सकता है रास्ता
इजरायल के दो अरब दलों के पास कुल 19 सीटें हैं। इन दलों ने नेतन्याहू की सत्ता में वापसी रोकने के लिए आइजनकोट को समर्थन देने की इच्छा जताई है। यदि वे सरकार में शामिल हुए बिना बाहर से समर्थन देते हैं, तो गठबंधन का संख्याबल बहुमत से आगे पहुंच सकता है। हालांकि, इस विकल्प को अपनाना आइजनकोट के लिए राजनीतिक रूप से आसान नहीं होगा।

 

चुनावी वादे और सहयोगियों की आपत्ति
आइजनकोट ने चुनाव प्रचार के दौरान अरब दलों के साथ सरकार नहीं बनाने का वादा किया था। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजरायल में राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां भी बदल गई हैं। ऐसे में अपने चुनावी रुख से पीछे हटना उनके लिए मुश्किल हो सकता है। सहयोगी नेता एविग्डोर लीबरमैन ने भी अरब दलों के समर्थन से सरकार बनाने का विरोध किया है। इससे आइजनकोट के सामने गठबंधन बनाने की चुनौती और बढ़ गई है।

 

अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स दलों से समझौते की संभावना
आइजनकोट के सामने दूसरा विकल्प दो अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी दलों का समर्थन हासिल करना है। इन दलों के पास कुल 13 सीटें हैं। यदि उनका समर्थन मिल जाता है, तो आइजनकोट का गठबंधन 61 सीटों के बहुमत तक पहुंच सकता है। हालांकि, इन दलों के साथ समझौते में सैन्य सेवा से जुड़ा मुद्दा बड़ी बाधा बन सकता है।

 

अनिवार्य सैन्य सेवा पर फंसा पेंच
इजरायल में अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी छात्रों को अनिवार्य सैन्य सेवा से मिलने वाली छूट लंबे समय से विवाद का विषय रही है। आइजनकोट और लीबरमैन इस छूट के विरोध में रहे हैं। दूसरी ओर, रूढ़िवादी दल इसे महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हैं। चुनाव के बाद यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म ने किसी उम्मीदवार को समर्थन देने से परहेज किया है, जबकि शास पार्टी ने नेतन्याहू का समर्थन किया है।

 

आइजनकोट विफल हुए तो नेतन्याहू को मौका
राष्ट्रपति की ओर से आइजनकोट को सरकार बनाने के लिए अधिकतम 42 दिनों का समय दिया गया है। यदि वह इस अवधि में बहुमत जुटाने में नाकाम रहते हैं, तो राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू को सरकार बनाने का एक और अवसर दे सकते हैं। नेतन्याहू के धार्मिक-राष्ट्रवादी गठबंधन की सीटें घटकर 53 रह गई हैं, लेकिन वह विरोधी खेमे के सांसदों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर सकते हैं।

 

राष्ट्रीय एकता सरकार का विकल्प
सरकार गठन में गतिरोध बना रहने पर राष्ट्रीय एकता सरकार का विकल्प भी सामने आ सकता है। इसमें आइजनकोट के सहयोगी दलों के साथ नेतन्याहू की लिकुड पार्टी शामिल हो सकती है। लिकुड 27 सीटों के साथ संसद की सबसे बड़ी पार्टी है। हालांकि, दोनों विरोधी खेमों के बीच गहरे राजनीतिक मतभेद और नेतन्याहू को सत्ता से हटाने का चुनावी वादा इस विकल्प को मुश्किल बनाते हैं।

 

सरकार नहीं बनी तो फिर होंगे चुनाव
यदि आइजनकोट और नेतन्याहू दोनों सरकार बनाने में असफल रहते हैं, तो इजरायल में किसी अन्य उम्मीदवार को सरकार बनाने का अवसर दिया जा सकता है। इसके लिए लगभग 100 दिनों की प्रक्रिया का विकल्प बताया गया है। यदि इसके बाद भी राजनीतिक सहमति नहीं बनती है, तो देश में नए आम चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने सभी राजनीतिक दलों से बातचीत और समझौते की अपील की है, ताकि देश को बार-बार चुनाव की स्थिति से बचाया जा सके।

 

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Ravi sinha

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Duniya mein kuch bada hone wala hai, taiyar rehna hoga.

Kavya Mishra

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Ravi sinha

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World leaders kya kadam uthayenge? Sabki nazar hai.

Nisha Shah

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Aise haalaaton mein diplomatic relations bahut important hote hain.

Taushif Shekh

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Yeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.

Pooja Reddy

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Yeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.

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3 घंटे पहले

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