Modi Praises Advani: पीएम मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी को दी जन्मदिन की शुभकामनाएं

पीएम मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी को दी जन्मदिन की शुभकामनाएं
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Ritika Ghosh

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Neta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!

Aryan Malhotra

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0 सेकंड पहले

Yeh news bahut zaroori hai public ke liye.

Aarav Sharma

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0 सेकंड पहले

Is maamle mein sarkari paksh kya hai?

Diya Gupta

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0 सेकंड पहले

Sarkar ko public ko jawab dena chahiye.

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आडवाणी के जन्मदिन पर पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का 8 नवंबर को जन्मदिन है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और देश के प्रति उनके योगदान को याद किया। आडवाणी 99 वर्ष पूरे कर अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े अनुभवों पर एक विशेष लेख भी साझा किया।

 

सोशल मीडिया पोस्ट में साझा की लेख की जानकारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने आडवाणी के जीवन और भारत के लिए उनके योगदान पर एक लेख लिखा है। इसमें उन्होंने आडवाणी के विभाजन के दौर के अनुभवों, जनसंघ को मजबूत करने, भारतीय जनता पार्टी के निर्माण और आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के प्रयासों का उल्लेख किया। लेख में सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली गई रथ यात्रा और सरकार में निभाई गई उनकी जिम्मेदारियों को भी शामिल किया गया है।

 

आडवाणी के साथ जुड़ी यादों को किया साझा
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में कहा कि आडवाणी के जन्मदिन का अवसर उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भावुक करने वाला है। उन्हें आडवाणी का स्नेह, मार्गदर्शन और साथ मिलता रहा है। मोदी ने उनके साथ बिताए समय और उनसे जुड़ी अनेक यादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आडवाणी का जीवन आधुनिक भारत के कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और ऐतिहासिक पड़ावों से जुड़ा रहा है।

 

विभाजन के बाद नए सिरे से शुरू किया जीवन
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को हुआ था। प्रधानमंत्री के अनुसार, 1947 में विभाजन के दौरान उन्हें सिंध में अपना परिचित वातावरण छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने बिना किसी कटुता के नए सिरे से जीवन की शुरुआत की। मोदी ने इस संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ने की क्षमता को आडवाणी के व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण विशेषता बताया।

 

जनसंघ से बीजेपी के निर्माण तक निभाई अहम भूमिका
प्रधानमंत्री ने बताया कि आडवाणी ने जनसंघ को मजबूत करने और बाद में भारतीय जनता पार्टी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बीजेपी अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान पार्टी का राजनीतिक विस्तार हुआ। मोदी ने 1989 के लोकसभा चुनाव और 1996 में बीजेपी के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने का उल्लेख करते हुए कहा कि आडवाणी ने कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियों को तैयार किया। उन्होंने पार्टी को राष्ट्र सर्वोपरि के सिद्धांत पर मजबूत आधार देने में योगदान दिया।

 

आडवाणी की वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक क्षमता की तारीफ
मोदी ने आडवाणी की दो प्रमुख खूबियों का उल्लेख किया। पहली उनकी वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक क्षमता है, जो उनके भाषणों, लेखों और साक्षात्कारों में दिखाई देती थी। दूसरी विशेषता राजनीतिक और वैचारिक मुद्दों पर उनकी स्पष्ट अभिव्यक्ति थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनसंघ और बीजेपी के लिए तैयार किए गए उनके प्रस्ताव आज भी अध्ययन के योग्य हैं।

 

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ बनाई राजनीतिक मिसाल
प्रधानमंत्री ने आडवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लंबे राजनीतिक सहयोग को भी याद किया। उन्होंने बताया कि राजस्थान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में काम करने के बाद आडवाणी दिल्ली पहुंचे और यहां अटल जी के साथ मिलकर राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हुए। मोदी के अनुसार, दोनों नेताओं ने कई दशकों तक एक-दूसरे का सहयोग किया और भारतीय राजनीति को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।

 

दिल्ली में जनसंघ को मजबूत करने में जुटे रहे
मोदी ने बताया कि विभाजन के बाद दिल्ली में पुनर्वास और नई शुरुआत का दौर चल रहा था। इसी समय आडवाणी ने जनसंघ को मजबूत करने के काम में खुद को समर्पित कर दिया। वर्ष 1967 में वे दिल्ली मेट्रोपॉलिटन काउंसिल के अध्यक्ष बने और विजय कुमार मल्होत्रा के साथ मिलकर काम किया। इस जिम्मेदारी के दौरान भी उन्होंने संगठन और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई।

 

संसद में अपने विचारों से बनाई अलग पहचान
प्रधानमंत्री के लेख के अनुसार, आडवाणी की संसदीय यात्रा 1970 में शुरू हुई। संसद में उनके विचारों और हस्तक्षेपों को विभिन्न राजनीतिक दलों ने महत्व दिया। सांसद, विपक्ष के नेता और सरकार में जिम्मेदारी निभाने के दौरान उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। संसदीय कामकाज के साथ वे देश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा करते और आम लोगों से संवाद करते रहे।

 

1991 के लोकसभा चुनाव से जुड़ी यादें साझा कीं
मोदी ने 1991 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय आडवाणी ने दो सीटों से चुनाव लड़ने का फैसला किया था, जिनमें गांधीनगर भी शामिल थी। गुजरात से उनका पुराना संबंध था। विभाजन के बाद उनके पिता कच्छ में बस गए थे और आडवाणी गुजरात से राज्यसभा सांसद भी रह चुके थे। मोदी ने बताया कि बीजेपी संगठन से जुड़े होने के कारण उन्हें आडवाणी के नामांकन पत्र तैयार कराने और चुनाव प्रचार में सहयोग करने का अवसर मिला। गांधीनगर की जनता ने उन्हें कई बार लोकसभा भेजा।

 

आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने आपातकाल को आडवाणी के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि उस दौर में आडवाणी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए सक्रिय रहे। उनके अनुभवों का उल्लेख उनकी पुस्तक 'अ प्रिजनर्स स्क्रैप-बुक' में मिलता है। इस पुस्तक के एक हिस्से में भारत में 1975 के आपातकाल और 1933 के नाजी जर्मनी की घटनाओं के बीच समानताओं पर चर्चा की गई है।

 

सरकार में मंत्री और गृह मंत्री के रूप में निभाई जिम्मेदारी
मोदी ने आडवाणी को प्रभावशाली विपक्षी नेता के साथ-साथ कुशल प्रशासक भी बताया। वर्ष 1977 में जनता सरकार बनने के बाद वे सूचना और प्रसारण मंत्री बने। बाद में उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और सुरक्षा बलों के हित में किए गए उनके कार्यों का उल्लेख किया। आतंकवाद के खिलाफ उनके सख्त रुख को भी याद किया गया।

 

सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा को बताया अहम पड़ाव
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली गई रथ यात्रा को आडवाणी के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा की योजना बनाने से लेकर उसके क्रियान्वयन तक उन्हें भी जुड़ने का अवसर मिला था। मोदी ने यात्रा के शुरुआती समय में सोमनाथ में मौजूद रहने की याद साझा की और आडवाणी की लंबी यात्रा के दौरान दिखाई गई प्रतिबद्धता तथा सहनशक्ति की सराहना की।

 

बिहार में गिरफ्तारी और राम मंदिर आंदोलन का जिक्र
मोदी ने बिहार में रथ यात्रा के दौरान आडवाणी की गिरफ्तारी से जुड़े घटनाक्रम को भी याद किया। उन्होंने बताया कि इसके बाद गुजरात में बीजेपी ने तत्कालीन चिमनभाई पटेल सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था। वर्षों बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनना इस लंबे राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रम का महत्वपूर्ण परिणाम रहा।

 

सादगी और पढ़ने के शौक का भी किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने आडवाणी के सादगीपूर्ण स्वभाव और सामान्य कार्यकर्ता की तरह काम करने की प्रवृत्ति की तारीफ की। उन्होंने जूनागढ़ में एक महीने तक कार्यकर्ता के रूप में रहने और विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटने का उदाहरण दिया। मोदी ने बताया कि आडवाणी को अखबार पढ़ने, इतिहास, सिनेमा और थिएटर में विशेष रुचि रही है। उनकी पुस्तक 'माई कंट्री माई लाइफ' में इतिहास के प्रति उनकी समझ और अनुभवों की झलक मिलती है।

 

सिंधी संस्कृति से जुड़ाव और कमला आडवाणी को किया याद
मोदी ने आडवाणी के सिंधी संस्कृति से जुड़े रहने और लेह के पास सिंधु दर्शन पूजा को लोकप्रिय बनाने की पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वे स्वयं आडवाणी और जॉर्ज फर्नांडीस के साथ इस तरह के एक आयोजन में शामिल हुए थे। प्रधानमंत्री ने आडवाणी की पत्नी कमला आडवाणी को भी याद किया और कहा कि उनके सार्वजनिक जीवन में वे हमेशा ताकत और सहयोग का स्रोत रहीं।

 

भारत रत्न सम्मान और अच्छे स्वास्थ्य की कामना
लेख के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि कराची में पले-बढ़े आडवाणी ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि उनका जीवन किस दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने वर्ष 2024 में आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने को देश की ओर से उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक बताया। मोदी ने उनके अच्छे स्वास्थ्य और निरंतर प्रेरणा देते रहने की कामना की।

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Ritika Ghosh

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Aryan Malhotra

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Yeh news bahut zaroori hai public ke liye.

Aarav Sharma

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Diya Gupta

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Sarkar ko public ko jawab dena chahiye.

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