राम मंदिर मुद्दे पर संसद में घमासान: पप्पू यादव के नाटक पर भाजपा का पलटवार

Shruti Bajpai
21 मिनट पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Nidhi kumari
49 मिनट पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Dev Kapoor
57 मिनट पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Sonu rai
1 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Aryan Malhotra
1 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Ravi sinha
2 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Aryan Malhotra
2 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Harsh Pandya
2 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Rohan Desai
3 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Navya Nair
3 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Aditya Verma
3 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Vihaan Patel
3 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Aarav Sharma
3 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Anil Sen
3 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Dev Kapoor
4 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Vaishali shinde
4 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Neel Saxena
4 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Vaishali shinde
4 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Kavya Mishra
6 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Pooja Reddy
6 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Ayaan Khan
6 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Aryan Malhotra
6 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Aarohi Chaudhary
7 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Nidhi kumari
7 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Priya Iyer
7 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Monika Das
7 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Vihaan Patel
8 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Dhruv Bhatt
8 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
संसद के मानसून सत्र के दौरान संसद परिसर में राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा अनियमितता के आरोपों को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव के नेतृत्व में एक सांकेतिक नुक्कड़ प्रस्तुति दी गई, जिसमें दान पेटी और पुजारी की वेशभूषा का इस्तेमाल किया गया। इस प्रदर्शन के बाद संसद परिसर का माहौल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से गरमा गया।
विपक्ष ने उठाए पारदर्शिता के सवाल
विपक्षी सांसदों का कहना है कि उनका उद्देश्य राम मंदिर में चढ़ावे के कथित प्रबंधन और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था। प्रदर्शन में कुछ सांसद श्रद्धालु की भूमिका में दिखाई दिए, जबकि सांकेतिक रूप से दान पेटी और धन संग्रह को लेकर सवाल उठाए गए। विपक्ष ने इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की भी मांग की।
भाजपा ने बताया आस्था का अपमान
भारतीय जनता पार्टी ने इस प्रदर्शन पर कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि संसद परिसर में इस तरह की प्रस्तुति से भगवान राम, सनातन परंपरा और संत समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है। पार्टी ने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर धार्मिक प्रतीकों का उपयोग उचित नहीं है और इसे संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
लोकसभा अध्यक्ष ने जताई नाराजगी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद परिसर में इस प्रकार के प्रदर्शन और वेशभूषा पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक बहस का मंच है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सदस्यों से संसदीय आचरण और नियमों का पालन करने की अपेक्षा जताई।
शिकायत और कानूनी कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन के बाद कुछ संगठनों और भाजपा नेताओं ने संबंधित सांसदों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, मामले में किसी भी कानूनी कार्रवाई का अंतिम निर्णय संबंधित जांच और सक्षम प्राधिकरण की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
मानसून सत्र में बढ़ा राजनीतिक टकराव
राम मंदिर से जुड़े इस विरोध प्रदर्शन के बाद संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है। एक ओर विपक्ष इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा इसे धार्मिक आस्था और संसदीय गरिमा से जुड़ा गंभीर विषय बता रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।






