Supreme Court Hears Key Cases: चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर सुप्रीम कोर्ट में जजों की अलग राय

Anil Sen
4 घंटे पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
Krishna Yadav
4 घंटे पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
Trapti Tanwar
6 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Shruti Bajpai
7 घंटे पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Tanya Bajaj
7 घंटे पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Trapti Tanwar
9 घंटे पहलेYeh rajneeti ka asli chehra hai.
Sai Mehta
9 घंटे पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Dhruv Bhatt
10 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
तीन मामलों पर सुनवाई
23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम व्यवस्था और छात्रा आकृति चौधरी से जुड़े NSA मामले पर अहम सुनवाई हुई। चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को लेकर जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ में अलग-अलग राय सामने आई, जबकि NSA मामले में 24 सितंबर को कोर्ट ने अपने आदेश को स्पष्ट किया।
चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून
मामला Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023 से जुड़ा है। इस कानून के तहत CEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री वाली तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है।
पीठ में अलग-अलग राय
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने याचिकाओं को पांच सदस्यीय संविधान पीठ को भेजने की मांग स्वीकार नहीं की, जबकि जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने माना कि कानून की संवैधानिक वैधता से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल पहली बार सीधे सामने आए हैं और बड़ी पीठ से सुनवाई की जरूरत है। दोनों जजों ने मामले को CJI के समक्ष रखने पर सहमति जताई।
स्वतंत्रता पर जोर
जस्टिस दत्ता ने कहा कि चुनाव आयोग का केवल स्वतंत्र होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका स्वतंत्र दिखाई देना भी जरूरी है। उन्होंने नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री की भूमिका को लेकर स्वतंत्र संतुलन से जुड़े सवाल उठाए।
सरकार की दलील
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने नियुक्ति व्यवस्था का बचाव किया। उन्होंने 2023 के Anoop Baranwal फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उस समय संसद की ओर से कानून न होने के कारण कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था बनाई थी, जबकि बाद में संसद ने नियुक्ति प्रक्रिया के लिए कानून बनाया।
कॉलेजियम पर बहस
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया की तुलना न्यायपालिका की कॉलेजियम व्यवस्था से की गई। इस पर जस्टिस दत्ता ने ‘जज ही जजों को नियुक्त करते हैं’ वाली सामान्य धारणा पर टिप्पणी करते हुए न्यायिक नियुक्तियों में सरकार, प्रशासनिक तंत्र, खुफिया रिपोर्ट और राष्ट्रपति की मंजूरी सहित कई स्तरों का उल्लेख किया।
सरकार की मंजूरी पर सवाल
जस्टिस दत्ता ने कॉलेजियम की सिफारिशों को कार्यपालिका द्वारा चुनिंदा तरीके से मंजूरी दिए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ नामों को मंजूरी और कुछ को रोकने की स्थिति न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया और न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल खड़े कर सकती है।
आकृति चौधरी का NSA मामला
दूसरा अहम मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी से जुड़ा है। अप्रैल 2026 में नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन से जुड़े मामले में गिरफ्तारी के बाद उन पर National Security Act लगाया गया था। 2 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी NSA हिरासत रद्द करते हुए गौतम बुद्ध नगर की DM मेधा रूपम के खिलाफ टिप्पणियां की थीं और 5 लाख रुपये के भुगतान का निर्देश दिया था।
DM की दलील
मेधा रूपम की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हाई कोर्ट ने DM को पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए बिना उनके खिलाफ कड़ी टिप्पणियां कीं और व्यक्तिगत आर्थिक जिम्मेदारी तय की। उन्होंने दलील दी कि NSA के तहत कार्रवाई कई प्रशासनिक स्तरों से गुजरती है और DM पूरी प्रक्रिया की अकेली जिम्मेदार अधिकारी नहीं होतीं।
सुप्रीम कोर्ट का संशोधित आदेश
24 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द करने वाले हाई कोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई है। कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के उन हिस्सों के संचालन पर रोक रखी, जिनमें DM मेधा रूपम के खिलाफ टिप्पणियां और उनकी सैलरी से 5 लाख रुपये की वसूली शामिल थी। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होनी है।
तीन मामलों से उठे सवाल
23 सितंबर की सुनवाई में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, न्यायिक नियुक्तियों में कॉलेजियम और सरकार की भूमिका तथा NSA कार्रवाई में अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़े अलग-अलग संवैधानिक सवाल सामने आए। चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर दोनों जजों की अलग राय के बाद मामले की आगे की प्रक्रिया CJI के स्तर पर तय होगी।








