राहुल गांधी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: ब्रिटिश नागरिकता का दावा खारिज

Nidhi kumari
1 दिन पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Ishaan Tiwari
1 दिन पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Taushif Shekh
1 दिन पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Pooja Reddy
1 दिन पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Ada khan
1 दिन पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Kavya Mishra
1 दिन पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Sai Mehta
1 दिन पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Neha Tripathi
1 दिन पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Dev Kapoor
1 दिन पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने उनकी भारतीय नागरिकता और संसद सदस्यता को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से राहुल गांधी के पास ब्रिटेन की नागरिकता होने का दावा किया गया था। हालांकि, अदालत के सामने इस दावे के समर्थन में पर्याप्त आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं किए जा सके। इसके बाद अदालत ने याचिका को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।
याचिकाकर्ता नहीं पेश कर पाया ठोस सबूत
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अब्देश कुमार चौधरी की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और उनके वकील अशोक पांडेय ने दावा किया कि राहुल गांधी ब्रिटेन के नागरिक हैं और इसलिए भारतीय नागरिक के तौर पर संसद सदस्य बने रहने के योग्य नहीं हैं। कोर्ट ने इन आरोपों के समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज पेश करने को कहा। याचिकाकर्ता ब्रिटेन के कंपनी रजिस्ट्रार या किसी अन्य सरकारी प्राधिकरण का ऐसा रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका, जिससे नागरिकता के दावे की पुष्टि हो सके।
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के पत्र को नहीं माना पर्याप्त
याचिकाकर्ता की ओर से सबूत के तौर पर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक पत्र पेश किया गया था। अदालत ने माना कि यह दस्तावेज राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। नागरिकता जैसे गंभीर कानूनी सवाल को साबित करने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड या सक्षम सरकारी प्राधिकरण से संबंधित प्रमाण की आवश्यकता होती है। केवल किसी संस्थान से जुड़े दस्तावेज के आधार पर किसी व्यक्ति की नागरिकता तय नहीं की जा सकती। इसी वजह से याचिकाकर्ता की दलील कमजोर पड़ गई।
याचिका वापस लेने की मांगी अनुमति
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता आरोपों के समर्थन में ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सका तो उसने अदालत से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने याचिका वापस लेने के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले को खारिज कर दिया। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार याचिकाकर्ता इससे पहले 2015 और 2019 में भी इसी तरह के आधार पर याचिकाएं दाखिल कर चुका था। इस बार भी पर्याप्त प्रमाण सामने नहीं आने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका।
बैकऑप्स लिमिटेड को लेकर लगाए गए थे आरोप
याचिका में दावा किया गया था कि राहुल गांधी ने वर्ष 2003 में ब्रिटेन में Backops Limited नाम की कंपनी शुरू की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि कंपनी से जुड़े दस्तावेजों में राहुल गांधी ने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था। हालांकि, अदालत के समक्ष इन दावों की पुष्टि करने वाला कोई निर्णायक ब्रिटिश सरकारी रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया। इसलिए केवल कंपनी से जुड़े कथित दस्तावेजों और आरोपों के आधार पर राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता पर सवाल खड़ा करने का आधार पर्याप्त नहीं माना गया।
कोर्ट के फैसले से विवाद पर फिलहाल विराम
इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद राहुल गांधी की नागरिकता को चुनौती देने वाली मौजूदा याचिका पर कानूनी प्रक्रिया फिलहाल समाप्त हो गई है। अदालत के सामने याचिकाकर्ता पर्याप्त सबूत प्रस्तुत नहीं कर पाया, जिसके चलते याचिका वापस लेकर खारिज कर दी गई। हालांकि, कोर्ट का यह आदेश आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्य साबित करने वाला फैसला नहीं है, बल्कि उपलब्ध सामग्री और याचिका की स्थिति के आधार पर आया आदेश है। राहुल गांधी की नागरिकता और संसद सदस्यता से जुड़े किसी भी भविष्य के विवाद का फैसला आधिकारिक रिकॉर्ड और लागू कानून के आधार पर ही होगा।







