ECI Explains Its Process: CEC को हटाने की प्रक्रिया पर चुनाव आयोग का जवाब

Aarav Sharma
0 सेकंड पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा
भारत निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त हलफनामा दाखिल किया है। इसमें आयोग ने अपने कामकाज, फैसले लेने की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के संवैधानिक प्रावधानों के बारे में जानकारी दी है। यह हलफनामा CEC के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया है।
CEC को हटाने के लिए क्या है नियम?
हलफनामे के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी प्रक्रिया और उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जा सकता है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए लागू होते हैं। आयोग ने कहा है कि CEC के कामकाज में हस्तक्षेप निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही होना चाहिए। यह मामला चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और उसके कामकाज से जुड़े कानूनी सवालों के बीच सामने आया है।
मीडिया रिपोर्टों को लेकर आयोग की दलील
आयोग ने हलफनामे में कहा है कि आंतरिक मतभेदों या कथित एकतरफा कामकाज से संबंधित मीडिया रिपोर्टों को अपने आप अदालत में सबूत नहीं माना जा सकता। रिपोर्टों के आधार पर दायर याचिकाओं की सुनवाई योग्य होने पर भी आयोग ने सवाल उठाए हैं। इन दलीलों पर अंतिम निर्णय अदालत के विचार और लागू कानून के आधार पर होगा।
ज्ञानेश कुमार के कामकाज को दी गई चुनौती
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिकाओं में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं के नाम शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा, राकेश कुमार सिंह और वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी भी याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं। चुनाव आयोग ने इन याचिकाओं के जवाब में अपना पक्ष रखा है।
फैसले लेने में बहुमत के नियम का प्रावधान
हलफनामे में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 के तहत आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद होने पर बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता है। आयोग का पक्ष है कि उसके कामकाज में किसी एक सदस्य के मनमाने फैसले की गुंजाइश नहीं है और निर्णयों की जांच कई स्तरों पर होती है।
फाइलों और हस्ताक्षरों के जरिए दर्ज होते हैं निर्णय
आयोग के अनुसार, सामान्य प्रक्रिया में फैसलों से जुड़ी फाइलें पहले एक निर्वाचन आयुक्त और फिर दूसरे निर्वाचन आयुक्त के पास जाती हैं। इसके बाद उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त के समक्ष रखा जाता है। मंजूर किए गए फैसलों को संबंधित फाइलों में दर्ज किया जाता है और उन पर आवश्यक हस्ताक्षर होते हैं। इसके बाद चुनाव आयोग का सचिवालय अधिसूचना जारी कर निर्णय लागू करता है।
आपातकालीन स्थिति में इलेक्ट्रॉनिक मंजूरी
हलफनामे में यह भी बताया गया है कि आपातकालीन परिस्थितियों में, जब तत्काल आदेश जारी करना जरूरी हो और आयोग के किसी सदस्य का व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहना संभव न हो, तो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मंजूरी ली जा सकती है। ऐसी मंजूरी को बाद में आधिकारिक फाइल में दर्ज किया जाता है। आयोग ने कहा है कि महत्वपूर्ण काम पूरे आयोग के अधीन होते हैं और निर्णयों का रिकॉर्ड रखा जाता है।
अब अदालत के फैसले पर नजर
चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे के जरिए निर्णय प्रक्रिया, बहुमत के नियम और CEC को पद से हटाने के प्रावधानों पर अपना पक्ष रखा है। अब इन दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और अदालत के निर्देश अहम होंगे। मामले में अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के निर्णय से स्पष्ट होगी।








