Wangchuk Demands Shah Resignation: लद्दाख हिंसा की बरसी पर सोनम वांगचुक ने अमित शाह के इस्तीफे की मांग की

Ravi sinha
2 दिन पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Aryan Malhotra
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Nidhi kumari
2 दिन पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Aryan Malhotra
2 दिन पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Priya Iyer
2 दिन पहलेYeh news bahut zaroori hai public ke liye.
Anil Sen
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Myra Dubey
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Shruti Bajpai
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Arjun Singh
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अमित शाह के इस्तीफे की मांग
लद्दाख में लेह पुलिस फायरिंग में चार नागरिकों की मौत की पहली बरसी पर सोनम वांगचुक ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। 20 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद सभा को संबोधित करते हुए वांगचुक ने पिछले साल हुई मौतों की जिम्मेदारी तय करने की मांग रखी।
लद्दाख में बंद
पिछले साल की पुलिस कार्रवाई में चार स्थानीय लोगों की मौत के विरोध में 24 सितंबर को पूरे लद्दाख में बंद रहा। वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लोगों ने लंबे समय तक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाईं और सवाल किया कि 2025 में हिंसा की स्थिति क्यों बनी।
छठी अनुसूची का मुद्दा
वांगचुक ने अपने भाषण में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा देने के कथित पुराने वादे का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि केंद्र के साथ लंबे समय तक चली बातचीत के बावजूद इस मांग पर सहमति नहीं बनी। ये दावे वांगचुक के बयान के रूप में हैं।
पिछले साल की हिंसा
24 सितंबर 2025 को लेह में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। पुलिस फायरिंग में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हुई और 44 लोग घायल हुए। घटना की न्यायिक जांच भी कराई गई, लेकिन उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।
वांगचुक की हिरासत
पिछले साल के विरोध प्रदर्शनों के बाद सोनम वांगचुक पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत मामला दर्ज किया गया था और उन्हें छह महीने के लिए जोधपुर जेल में रखा गया था। मार्च 2026 में केंद्र ने उनकी NSA हिरासत रद्द कर दी थी।
केंद्र के साथ बातचीत
लद्दाख के प्रतिनिधियों और केंद्र के बीच संवैधानिक सुरक्षा और अधिक लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को लेकर बातचीत जारी है। सितंबर 2026 में हुई चर्चाओं में लद्दाख के लिए अनुच्छेद 371(K) जैसे संवैधानिक प्रावधान का प्रस्ताव भी सामने आया है, जबकि इसके तहत अधिकारों और शक्तियों को लेकर बातचीत जारी है।









