Dewasnews MP liquor Case MP news: एमपी में 3 महीने में तीसरा शराब कांड, देवास में 13 मौतों से हड़कंप

एमपी में 3 महीने में तीसरा शराब कांड, देवास में 13 मौतों से हड़कंप
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मध्य प्रदेश में शराब पीने के बाद लोगों की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। देवास जिले के दो गांवों में 20 दिनों के भीतर 13 लोगों की मौत होने से हड़कंप मच गया है। मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनके अपनों की जान शराब पीने के बाद गई। कुछ लोगों की आंखों की रोशनी भी चली गई थी। वहीं, जिला प्रशासन ने जहरीली शराब से मौत होने की बात को खारिज करते हुए अलग-अलग कारणों को जिम्मेदार बताया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

 

 

देवास के दो गांवों में 13 लोगों की मौत

यह मामला देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों का है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, 27 सितंबर से 16 अक्टूबर 2026 के बीच दोनों गांवों में 13 लोगों की मौत हुई। इनमें चंदाना गांव के 9 और पड़ोसी बिंजाना गांव के 4 लोग शामिल हैं। मृतकों में ज्यादातर मजदूरी करने वाले लोग बताए जा रहे हैं।

 

मृतकों के परिवारों का दावा है कि इनमें से 10 लोगों की मौत शराब पीने के बाद हुई। हालांकि, शराब ही मौतों की वजह थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था, इसकी अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

 

 

परिजनों का दावा- पहले आंखों की रोशनी गई, फिर मौत

मृतकों के परिजनों ने बताया कि शराब पीने के बाद कुछ लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी। उन्हें उल्टी, चक्कर और आंखों से दिखाई देने में परेशानी जैसी शिकायतें हुईं। कुछ लोगों के मुंह से झाग निकलने की बात भी सामने आई है।

 

चंदाना गांव के फूल सिंह के मुताबिक, शराब पीने के बाद उनकी आंखों की रोशनी चली गई। समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण उनकी जान बच गई, लेकिन उन्हें अब भी दिखाई देने में परेशानी है। उन्होंने बताया कि उनके 32 वर्षीय बेटे किशोर की भी शराब पीने के बाद तबीयत बिगड़ी थी और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। उनके बड़े भाई बल्लू सिंह की भी इसी दौरान मौत हुई।

 

परिजनों के इन दावों के बाद गांवों में शराब की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

 

चार दोस्तों ने साथ बैठकर पी शराब, अगले दिन चारों की मौत

ग्रामीणों के अनुसार, चंदाना गांव में 15 अक्टूबर को दीपक रावत (28), जितेंद्र (35), ओमप्रकाश (35) और भीमा (55) ने एक साथ बैठकर शराब पी थी। आरोप है कि अगले दिन चारों की मौत हो गई।

 

इसके अलावा कैलाश प्रजापत (28) और संजय (25) की तबीयत भी शराब पीने के बाद बिगड़ने की बात सामने आई। दोनों का इंदौर के अस्पतालों में इलाज चलने की जानकारी दी गई थी। संजय के परिजनों का कहना है कि उसकी आंखों की रोशनी प्रभावित हुई और उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा।

 

इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों ने शराब की बिक्री और उसकी गुणवत्ता की जांच कराने की मांग उठाई है।

 

शराब की बिक्री के 'डायरी सिस्टम' पर भी सवाल

ग्रामीणों के मुताबिक, चंदाना गांव में कुछ लोग शराब खरीदने के लिए स्थानीय विक्रेताओं पर निर्भर थे। मृतकों के परिजनों ने विंदू जायसवाल और विष्णु जायसवाल से शराब खरीदने की बात कही है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों के फरार होने की जानकारी भी सामने आई थी। हालांकि, इस संबंध में आरोपों और पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

 

ग्रामीणों ने शराब की बिक्री में कथित 'डायरी सिस्टम' का भी जिक्र किया है। इस व्यवस्था में शराब की बिक्री का हिसाब एक डायरी में दर्ज किए जाने की बात कही गई है। अब यह जांच का विषय है कि संबंधित शराब कहां से लाई गई थी और उसकी बिक्री किन लोगों के माध्यम से हुई।

 

 

प्रशासन ने जहरीली शराब से मौत होने की बात नकारी

देवास जिला प्रशासन ने जहरीली शराब से मौत होने के दावों को भ्रामक बताया है। अधिकारियों के मुताबिक, चंदाना गांव में हुई मौतों के पीछे अन्य कारण भी सामने आए हैं। इनमें सामान्य बीमारियां, अधिक उम्र, ब्रेन हेमरेज और अत्यधिक शराब सेवन जैसी वजहें बताई गई हैं।

 

आबकारी विभाग के अधिकारियों ने भी कहा कि शराब की जांच में जहरीले पदार्थ की पुष्टि नहीं हुई। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अत्यधिक शराब सेवन के कारण कई अंगों के काम करना बंद कर देने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि यदि कोई नया तथ्य सामने आता है तो उसकी भी जांच कराई जाएगी।

 

इस तरह, एक तरफ परिजन शराब पीने के बाद मौत होने और आंखों की रोशनी जाने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन जहरीली शराब से मौत की पुष्टि नहीं कर रहा है।

 

अब उच्चस्तरीय जांच, 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

मामले को गंभीरता से लेते हुए उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। जांच के लिए पांच अधिकारियों की टीम बनाई गई है। इसका नेतृत्व उज्जैन के अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक करेंगे।

 

टीम में मंदसौर जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राम स्नेही मिश्रा, रतलाम के एसडीओपी, उज्जैन संभाग के उपायुक्त आबकारी और लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के क्षेत्रीय संचालक को शामिल किया गया है।

 

जांच टीम को मौतों के कारणों और उनसे जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर 15 दिनों के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपनी है। जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि मौतें किन परिस्थितियों में हुईं और शराब की इसमें कोई भूमिका थी या नहीं।

 

 

तीन महीने में शराब से जुड़ी तीसरी बड़ी घटना

मध्य प्रदेश में पिछले तीन महीनों के दौरान शराब से जुड़ी तीसरी बड़ी घटना सामने आने की बात कही जा रही है।

 

अगस्त: गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब से 13 लोगों की मौत का मामला सामने आया था। जांच में मध्य प्रदेश से जुड़े कथित आपूर्ति नेटवर्क की बात भी सामने आई थी।
सितंबर: सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में मिलावटी शराब से कई लोगों की मौत हुई। इस मामले में पुलिस ने नकली शराब की आपूर्ति और बिक्री से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की।
अक्टूबर: अब देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में 13 लोगों की मौत का मामला सामने आया है। हालांकि, यहां जहरीली शराब से मौत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

 

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने शराब की गुणवत्ता की जांच, अवैध बिक्री पर रोक और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

 

फिलहाल, देवास मामले में मौतों की वास्तविक वजह उच्चस्तरीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। परिजनों के आरोप, प्रशासन के दावे और चिकित्सकीय रिपोर्ट के निष्कर्षों की जांच के बाद ही यह तय हो पाएगा कि इन मौतों के पीछे शराब की क्या भूमिका थी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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