चुनाव आयोग नागरिकता तय करने वाली संस्था नहीं: SC: राशन रोकना गलत, चुनाव आयोग को फटकार

राशन रोकना गलत, चुनाव आयोग को फटकार
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Kavya Mishra

Kavya Mishra

0 सेकंड पहले

Samaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.

Trapti Tanwar

Trapti Tanwar

0 सेकंड पहले

Yeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.

Saanvi Pandey

Saanvi Pandey

0 सेकंड पहले

Yeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

0 सेकंड पहले

Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Yash Kulkarni

Yash Kulkarni

0 सेकंड पहले

Logon ki madad karna hi asli dharam hai.

Nidhi kumari

Nidhi kumari

0 सेकंड पहले

Community ko mil ke aage aana hoga is mudde par.

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संदेश: वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब नागरिकता खत्म नहीं, राशन-योजनाएं रोकना भी गलत,सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता पर दिया बड़ा स्पष्टीकरण नई दिल्ली में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने का अर्थ किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त होना नहीं है। कोर्ट ने कहा कि वोटर सूची केवल चुनावी प्रक्रिया का रिकॉर्ड है, नागरिकता का प्रमाण नहीं।

 

 चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग (ECI) का कार्य केवल मतदाता सूची तैयार करना और उसका प्रबंधन करना है। किसी नागरिक की वैध नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर संदेह उत्पन्न होता है तो आयोग केवल संबंधित मामला केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकरण के पास भेज सकता है।


राशन और सरकारी योजनाएं रोकने पर जताई चिंता
अदालत ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की कि वोटर लिस्ट से नाम हटने के आधार पर कुछ लोगों को राशन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से वंचित किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि किसी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण नागरिकों के सामाजिक और संवैधानिक अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए। ऐसे कदम संविधान की भावना के अनुरूप नहीं हैं।

 

कांग्रेस नेता की PIL पर हुई सुनवाई
यह मामला कांग्रेस नेता प्रसेनजीत बोस द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इससे प्रभावित लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है।


चुनाव आयोग और बंगाल सरकार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और पश्चिम बंगाल सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने विधानसभावार हटाए गए मतदाताओं का पूरा डेटा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संशोधन प्रक्रिया किस आधार पर की गई।


अगली सुनवाई 25 अगस्त को
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 तय की है। अदालत के इस रुख को उन लाखों नागरिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्हें आशंका थी कि वोटर लिस्ट से नाम हटने के कारण उनकी नागरिकता या सरकारी सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई और चुनाव आयोग के जवाब पर टिकी हैं।

 

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Kavya Mishra

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0 सेकंड पहले

Samaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.

Trapti Tanwar

Trapti Tanwar

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Yeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.

Saanvi Pandey

Saanvi Pandey

0 सेकंड पहले

Yeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

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Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Yash Kulkarni

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Logon ki madad karna hi asli dharam hai.

Nidhi kumari

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0 सेकंड पहले

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