Pharma MD Arrested in GST Case: हिमाचल में 6.55 करोड़ का फर्जी ITC

Anika Rajput
2 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Neel Saxena
4 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Ravi sinha
6 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Monika Das
7 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Aarohi Chaudhary
8 घंटे पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Shruti Bajpai
9 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Dhruv Bhatt
9 घंटे पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र में CGST शिमला कमिश्नरेट के प्रिवेंटिव विंग ने फर्जी इनवॉइस के जरिए कथित तौर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट और जीएसटी रिफंड हासिल करने के नेटवर्क का खुलासा किया है। विभाग के अनुसार मामले में करीब 6.55 करोड़ रुपये के अपात्र ITC का पता चला है। कार्रवाई के दौरान त्रिलोकपुर स्थित समय फार्मा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर गौरव जैन को गिरफ्तार किया गया है।
10 गैर-मौजूद फर्मों के इनवॉइस का इस्तेमाल
जांच में आरोप है कि समय फार्मा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और ड्यूल हेल्थकेयर ने कई फर्जी या गैर-मौजूद सप्लायर फर्मों के इनवॉइस के आधार पर ITC का लाभ लिया। अधिकारियों के मुताबिक करीब 5.55 करोड़ रुपये का ITC 10 गैर-मौजूद फर्मों से जुड़े इनवॉइस के माध्यम से लिया गया। जांच में ऐसे बिल भी सामने आए, जिनमें दर्ज माल की वास्तविक आवाजाही की पुष्टि ई-वे बिल और टोल प्लाजा डेटा से नहीं हो सकी।
बिना वास्तविक माल सप्लाई के बिलिंग का आरोप
CGST की जांच में फर्जी फर्मों, संदिग्ध अकाउंटिंग एंट्री और बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के इनवॉइस जारी किए जाने के कथित साक्ष्य मिले हैं। विभाग के अनुसार फर्जी तरीके से हासिल ITC को जीएसटी रिफंड दावों में शामिल कर सरकारी खजाने से नकद रिफंड लेने का प्रयास किया गया। अधिकारियों ने मामले से जुड़े लोगों के बयान दर्ज करने के साथ डिजिटल साक्ष्य, व्हाट्सऐप चैट और बैंकिंग लेन-देन की भी जांच की है।
ड्यूल हेल्थकेयर को शेल इकाई के तौर पर इस्तेमाल करने का दावा
जांच एजेंसी का दावा है कि ड्यूल हेल्थकेयर का इस्तेमाल कथित तौर पर शेल इकाई के रूप में किया जा रहा था और इसके संचालन में गौरव जैन की सक्रिय भूमिका सामने आई। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर CGST अधिकारियों ने उन्हें केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 69(1) के तहत गिरफ्तार किया है। मामले में आगे की जांच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा फर्मों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने की कोशिश का आरोप
जांच के मुताबिक कथित फर्जी इनवॉइस के जरिए ITC हासिल करने और उसे रिफंड दावों में इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। अधिकारियों को ऐसे दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं, जिनकी जांच के आधार पर पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली को समझने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल सामने आए 6.55 करोड़ रुपये के अपात्र ITC को लेकर कार्रवाई की गई है और जांच आगे बढ़ने के साथ वित्तीय लेन-देन की और जानकारी सामने आने की संभावना है।
गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ा
CGST प्रिवेंटिव विंग की कार्रवाई के बाद अब जांच का फोकस कथित फर्जी सप्लायर फर्मों, इनवॉइस और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन पर है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार कई लोगों के बयान और डिजिटल साक्ष्य जांच का हिस्सा हैं। MD गौरव जैन की गिरफ्तारी के बाद एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस कथित ITC नेटवर्क में और कौन-कौन सी फर्में या लोग शामिल थे। फिलहाल आरोप जांच के अधीन हैं और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।






