जयपुर मर्डर मिस्ट्री: एक्सीडेंट की आड़ में रची गई थी खौफनाक साजिश

एक्सीडेंट की आड़ में रची गई थी खौफनाक साजिश
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Harsh Pandya

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0 सेकंड पहले

Aise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.

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राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रताप नगर इलाके से रिश्तों को पूरी तरह से तार-तार कर देने वाला एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। जिस मां ने एक साल पहले पति की मौत के बाद बिखरते परिवार को संभाला और अपने मानसिक रूप से बीमार बेटे के इलाज के लिए दिन-रात एक कर रही थी, उसी की सगी 23 वर्षीय बेटी आयुषी शर्मा ने करोड़ों की जायदाद और सरकारी नौकरी के लालच में अपनी मां की हत्या की खौफनाक साजिश रच डाली।  
इस सनसनीखेज हत्याकांड को महज एक 'हिट एंड रन' यानी सड़क हादसा दिखाने की पूरी कोशिश की गई थी, लेकिन प्रताप नगर थाना पुलिस की पैनी जांच और सीसीटीवी फुटेज ने इस अमानवीय मर्डर मिस्ट्री का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने आरोपी बेटी और उसके ताऊ समेत 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

 

14 करोड़ की जायदाद और अनुकंपा नौकरी का जानलेवा लालच
डीसीपी (ईस्ट) रंजिता शर्मा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मृतका नीरज शर्मा (45) के पति विजय कुमार शर्मा अदालत में कोर्ट मास्टर (लिपिक) थे। करीब एक साल पहले उनके निधन के बाद नियमों के तहत पत्नी नीरज शर्मा को अनुकंपा नियुक्ति के रूप में एलडीसी (LDC) की सरकारी नौकरी मिल गई थी।  
आरोपी बेटी आयुषी खुद यह नौकरी हासिल करना चाहती थी और मां द्वारा नौकरी जॉइन करने के फैसले से वह बुरी तरह रंजिश रखने लगी थी। इसके अलावा नीरज शर्मा के नाम पर करीब 4 करोड़ रुपये के मकान और हाईवे पर स्थित लगभग 10 करोड़ रुपये की कीमती जमीन (कुल करीब 14 करोड़ की संपत्ति) थी। इसी नौकरी और बेहिसाब दौलत को पूरी तरह से हड़पने के लिए आयुषी ने अपने ताऊ मोहन स्वरूप और ताऊ के बेटे बलराम उर्फ रवि के साथ मिलकर अपनी ही मां को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया।  

 

7 लाख रुपये में दी गई हत्या की सुपारी
पुलिस जांच के अनुसार, आयुषी, ताऊ मोहन स्वरूप और चचेरे भाई बलराम ने मिलकर भरतपुर के बदमाश हेमंत शर्मा को नीरज शर्मा की हत्या के लिए 7 लाख रुपये की सुपारी दी थी। वारदात में शामिल अन्य सह-आरोपियों को भी एक-एक लाख रुपये बांटे गए थे।  
मर्डर की पहली साजिश के तहत भरतपुर से एक थार गाड़ी मंगवाकर नीरज शर्मा को कुचलने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह योजना विफल रही। इसके बाद आरोपियों ने हार नहीं मानी और करीब एक महीने तक मृतका की रेकी (निगरानी) की गई।  

 

130 किमी/घंटा की रफ्तार से आ रही स्कॉर्पियो से मारी टक्कर
3 जुलाई की शाम करीब 4:45 बजे, जब नीरज शर्मा अपने 15 वर्षीय मानसिक रूप से बीमार बेटे को डॉक्टर से दिखाकर (कोचिंग से लेकर) पैदल घर लौट रही थीं, तभी पूरी प्लानिंग के साथ हरियाणा नंबर की सफेद स्कॉर्पियो कार ने उन्हें पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। कार की रफ्तार करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटा थी। टक्कर इतनी भयानक थी कि नीरज शर्मा हवा में 100 फीट दूर जाकर गिरीं और मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।  
भाई की शंका से खुला राज: शुरुआत में इसे आम सड़क दुर्घटना माना जा रहा था, लेकिन मृतका के भाई राकेश को अपनी भांजी आयुषी की हरकतों पर शक हुआ। उन्होंने हत्या की आशंका जताते हुए मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने जब इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो पाया कि कार ने जानबूझकर गलत साइड में जाकर महिला को निशाना बनाया था, जिससे एक्सीडेंट की ये झूठी कहानी ताश के पत्तों की तरह ढह गई।  

 

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी, चचेरा भाई अब भी फरार
प्रताप नगर थाना पुलिस ने बेहद त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता बेटी आयुषी शर्मा, ताऊ मोहन स्वरूप शर्मा, शूटर/कांट्रैक्ट किलर हेमंत शर्मा, ड्राइवर आकाश शर्मा, अरविंद शर्मा, मोहित शर्मा और रोहित जाटव को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, इस खौफनाक साजिश का एक मुख्य किरदार और आयुषी का चचेरा भाई बलराम उर्फ रवि अभी भी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।  

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