पवार-शिंदे मुलाकात बनी राजनीतिक चर्चा का केंद्र: संजय राउत ने जताई नाराजगी

संजय राउत ने जताई नाराजगी
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Monika Das

Monika Das

0 सेकंड पहले

Yeh rajneeti ka asli chehra hai.

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महाराष्ट्र विधानसभा परिसर (विधान भवन) में एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच हुई करीब 15 मिनट की मुलाकात ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। यह मुलाकात महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद से संबंधित एक उच्चस्तरीय समिति की बैठक के बाद हुई, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।


 संजय राउत ने जताई नाराजगी
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने इस मुलाकात पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विपक्ष जिस नेतृत्व को राजनीतिक रूप से अपना विरोधी मानता है, उसके कार्यालय में जाकर मुलाकात करना महा विकास अघाड़ी (MVA) के समर्थकों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है। राउत ने इसे गठबंधन के कार्यकर्ताओं के लिए असहज स्थिति बताया।


एनसीपी (SP) ने किया बचाव
एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेताओं ने इस विवाद को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल शिष्टाचार भेंट (Courtesy Meeting) थी। विधायक जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के बीच औपचारिक मुलाकात को राजनीतिक अर्थ नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि व्यावहारिक और रणनीतिक सोच से संचालित होती है।

 

एकनाथ शिंदे का पलटवार
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वरिष्ठ नेता के स्वागत और मुलाकात को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आलोचना करने वालों पर तंज कसते हुए कहा कि यदि किसी को इस मुलाकात से परेशानी है, तो उसे इसे अनावश्यक मुद्दा नहीं बनाना चाहिए।


सीमा विवाद की बैठक के बाद हुई थी मुलाकात
सरकारी सूत्रों के अनुसार, शरद पवार विधान भवन में महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद से जुड़ी उच्चस्तरीय समिति की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। बैठक समाप्त होने के बाद वे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय गए, जहां दोनों नेताओं के बीच विभिन्न विषयों पर संक्षिप्त चर्चा हुई। हालांकि मुलाकात के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।


MVA में सियासी अटकलें तेज
इस मुलाकात के बाद महा विकास अघाड़ी (MVA) के भीतर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां एक ओर सहयोगी दलों के कुछ नेताओं ने इसे सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार बताया, वहीं कुछ नेताओं ने इसे लेकर सार्वजनिक असहमति जताई। फिलहाल इस मुलाकात को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से बयान दे रहे हैं, जबकि आगे की राजनीतिक स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।

 

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