अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन को उम्रकैद: दिल्ली दंगा केस में 5 दोषियों को आजीवन कारावास

Aarav Sharma
0 सेकंड पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Ritika Ghosh
0 सेकंड पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Harsh Pandya
0 सेकंड पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Vaishali shinde
0 सेकंड पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Rohan Desai
0 सेकंड पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Vivaan Gupta
0 सेकंड पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Vaishali shinde
0 सेकंड पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Vihaan Patel
0 सेकंड पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Nidhi kumari
46 मिनट पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Neha Tripathi
1 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Neel Saxena
1 घंटे पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Ritika Ghosh
1 घंटे पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Krishna Yadav
2 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Rohan Desai
2 घंटे पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Aarohi Chaudhary
3 घंटे पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Ada khan
3 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Aryan Malhotra
3 घंटे पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Vivaan Gupta
4 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
नई दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान हुए चर्चित आईबी सुरक्षा सहायक अंकित शर्मा हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई। अदालत ने माना कि यह हत्या सुनियोजित और बेहद क्रूर तरीके से की गई थी। इस फैसले को दिल्ली दंगा मामलों में सबसे अहम न्यायिक निर्णयों में से एक माना जा रहा है।
ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद
अदालत ने इस मामले में ताहिर हुसैन के अलावा जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से इनकी संलिप्तता साबित होती है। सभी दोषियों को हत्या, साजिश और दंगा फैलाने से जुड़े गंभीर आरोपों में दोषी पाया गया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी- 'क्रूरता की पराकाष्ठा'
सजा सुनाते समय अदालत ने अपराध की गंभीरता पर कठोर टिप्पणी करते हुए कहा कि हत्या का तरीका अत्यंत क्रूर और अमानवीय था। न्यायालय ने कहा कि हत्या के बाद भी क्रूरता समाप्त नहीं हुई और शव को नाले में फेंक दिया गया, जो मानवता को झकझोर देने वाला कृत्य था। अदालत ने इस अपराध को समाज के लिए बेहद गंभीर बताया और कहा कि ऐसी घटनाएं कानून के शासन को चुनौती देती हैं।
फांसी की मांग खारिज, उम्रकैद को माना उचित
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस और अभियोजन पक्ष ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। रिपोर्ट के अनुसार अंकित शर्मा के शरीर पर 51 गंभीर चोटों के निशान मिले थे। हालांकि अदालत ने माना कि मामला अत्यंत गंभीर है, लेकिन इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' की अंतिम श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर दोषियों को फांसी के बजाय आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
छह आरोपी साक्ष्यों के अभाव में बरी
इस मामले में क्राइम ब्रांच ने 648 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों का परीक्षण करने के बाद छह आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण न मिलने पर उन्हें बरी कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर ही दोष सिद्ध किया जा सकता है।
फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज
घटना के समय ताहिर हुसैन आम आदमी पार्टी के पार्षद थे। दंगों में नाम सामने आने के बाद पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था। अदालत के फैसले के बाद बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा है कि वे इस निर्णय को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। वहीं, पीड़ित पक्ष ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।







